- Hindi News
- गमाडा के डीटीपी ने रची फ्रॉड की स्क्रिप्ट
गमाडा के डीटीपी ने रची फ्रॉड की स्क्रिप्ट
भास्कर न्यूज - मोहाली
गमाडा के सेक्टर-113 में ग्रुप हाउसिंग के नाम पर गीतू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ((जेसीपीएल)) की ओर से जो सवा ४ करोड़ रुपए का फ्रॉड किया गया उसकी पूरी स्क्रिप्ट गमाडा के डिवीजनल टाउन प्लानर ((डीटीपी)) ने तैयार की थी। शिकायकर्ता ने पुलिस को डीटीपी द्वारा तैयार किए पूरे प्रोजेक्ट की कापी भी दी थी।
प्रोजेक्ट के साथ बताया गया था कि पांच करोड़ रुपए लगाने के बाद ६ माह में 15 करोड़ रुपए का फायदा होगा। पुलिस ने डीटीपी को साचिश रचने का आरोपी बनाया है। जिसे एफआईआर दर्ज कर खाना नंबर २ में रखा है और उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। डीटीपी इस समय ग्रेटर लुधियाना डेवलपमेंट अथॉरिटी ((गमाडा)) में डीटीपी के पद पर तैनात है।
जमीन बेचकर लगाए थे पैसे : फेज-3ए के जसविदंर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि उन्होंने कुराली के पास स्थित गांव रकौली में जमीन 2011 में बेची थी। इसके बाद उन्हें गमाडा के तत्कालीन डीटीपी मीतइंद्र सिंह मान मिले। उन्होंने बताया कि उनका एक दोस्त विकास गोयल है जो जेसीपीएल में ग्रुप हाउसिंग का प्रोजेक्ट 4 एकड़ में काट रहा है यदि वहां पर पैसे लगाए जाए तो फायदा होगा। इसके लिए उन्होंने उन दोनों को मिलाया और 5/५ करोड़ रुपए की भागीदारी में काम करने को कहा।
डीटीपी ने कहा ५ करोड़ लगाओ तो १५ करोड़ मिलेगा : जसविंदर ने बताया कि डीटीपी मीतइंद्र मान ने उसे कागज पर पूरा हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाकर और उसकी सेल करने के बाद ५ करोड के बदले में मात्र ६ माह के अंदर की १५ करोड़ रुपए का फायदा होगा। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पार्टनरों द्वारा पहले १० करोड की इंवेस्टमेंट करनी पड़ेगी।
जमीन न होने के बावजूद किया एमओयू साइन: जसविंदर ने बताया कि डीटीपी मदद से जेसीपीएल मालिक विकास गोयल व उसके पिता राजकुमार ने उसके साथ इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को लेकर एमओयू भी साइन किया। जिसके चलते उन्होंने जनवरी २०११ को पहली किश्त २ करोड़ रुपए के रुप में दी। उसके बाद जुलाई माह में शेष पूरी राशि दे दी गई। जब उनको ६ माह बाद पैसे नहीं मिले तो इस मामले को उठाया तो उन्हें दिसंबर २०१२ व जनवरी २०१३ के पांच चैक दो करोड़ रुपए राशी के दे दिए गए। उन्होंने यह चेक बाउंस हो गए।