कोटकपूरा से पूरे पंजाब का पैदल सफर
गौरव भाटिया - चंडीगढ़
यह एक जागरूकता अभियान ही नहीं, मेरे लिए एक मिशन है और मैं इसे हर हाल में पूरा करूंगी। यह कहना है सुख बराड़ का। 28 वर्षीय सुख ने अपने मिशन के तहत पूरे पंजाब में पैदल चलकर लोगों को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। अपने इस सफर में सुख पंजाब के 32 में से 11 डिस्ट्रिक्ट्स में जा चुकी हैं। 10 जनवरी को डिस्ट्रिक्ट फरीदकोट के कोटकपूरा शहर से शुरू हुई यह यात्रा 20 फरवरी को खत्म होगी। शुक्रवार को सुख मोहाली में होंगी, जबकि शनिवार को चंडीगढ़ पहुंचेंगी।
थैलेसीमिया में पंजाब सबसे ऊपर: माउंटेनियर और स्काई डाइवर सुख ने बताया कि उनकी एक दोस्त थैलेसीमिया से ग्रस्त हुई और तब उनका ध्यान इस ओर गया। इस विषय पर सर्च किया तो पाया कि भारत में पंजाब थैलेसीमिया के मामलों में सबसे ऊपर है। इस विषय को लेकर वे मुंबई तक गईं और उन संस्थाओं से बात की, जो इस क्षेत्र में लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसके बाद वापस पंजाब आकर देखा कि थैलेसीमिया के मामले इतने ज्यादा हैं, लेकिन पंजाब सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के ज्यादातर गवर्नमेंट अस्पतालों में थैलेसीमिया का इलाज ही नहीं होता। यही नहीं, गवर्नमेंट अस्पताल में तो इसकी दवाई तक उपलब्ध नहीं है। इसलिए वे जिस भी शहर में जाती हैं, वहां के स्कूल या कॉलेज में जाकर स्टूडेंट्स को थैलेसीमिया के प्रति जागरूक कर रही हैं। इसके लिए हर शहर में संबंधित एनजीओ की हेल्प ली जा रही है। वे चाहती हैं कि पंजाब में जो भी लोग शादी करवाएं, उन्हें इसके लिए पहले एक ऐसा मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना हो, जिससे यह साफ हो सके कि संबंधित व्यक्ति थैलेसीमिया से पीडि़त नहीं है।
फरीदकोट के गांव हरिनो निवासी सुख बराड़ ने कहा कि रोज वे 30 से 40 किलोमीटर पैदल चलती हैं। अपने इस टूर में कुल 1150 किलोमीटर का सफर पूरा करना है। कोटकूपरा से शुरू हुआ सफर कोटकपूरा में ही खत्म होगा। सुख ने कहा कि उनके पेरेंट्स ने भी पूरा स्पोर्ट किया है। सुख के साथ उनके दोस्त सौरव साइकिल पर चलते हैं।
1150 किमी. चलना है सुख बराड़ को।
थैलेसीमिया मिशन
थैलेसीमिया के प्रति जागरूक करने आज मोहाली पहुंचेंगी सुख बराड़