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\"धान की फसल काटने के बाद खेत में लगाए आग\'

7 वर्ष पहले
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डेराबस्सीकेएसडीएम संजीव बांसल ने किसानों कंबाइन मालिकों को धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में बचीखुची पराली को फूंकने की बजाय उसे कंबाइन की मदद से जड़ से उखाड़ने की अपील की। खेतीबाड़ी महकमे के सहयोग से डेराबस्सी में आयोजित बैठक में एसडीएम ने कहा कि पैडी स्ट्रा को आग से नष्ट करना वैसे भी कानूनी जुर्म है। इससे जहां पर्यावरण दूषित होता है, वहीं खेतों की मिट्टी के लाभदायक कीटाणु खत्म होने से जमीन का उपजाऊपन कहीं कम हो जाता है। खेतों में सब्जियां उगाने वाले किसान पांच फीसदी भी नहीं है। फसली चक्र में बदलाव में ढ़ेरों प्रयासों के बावजूद किसान अब भी रिवायती फसलों को तरजीह दे रहे हैं। एसडीएम ने बताया कि 90 फीसदी किसान कई एकड़ जमीन होने के बावजूद सब्जियों के लिए आज भी मंडियों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि रात के समय कंबाइन चलाई जाएं, ही नमी वाली धान की कटाई की जाए ताकि धान बेचने में किसानों को कोई दिक्कत पेश आए। उन्होंने कहा कि पैडी स्ट्रा के जड़ से उन्मूलन के लिए कंबाइन में पैडी स्ट्रा चौपर, स्प्रेडर या पैडी चौप कम कटर का इस्तेमाल किया जाए जो कम कीमत में आसानी से उपलब्ध है। इससे पराली फूंकने की जरुरत नहीं पड़ती और अगली फसल की बीजाई में लाभदायक रहती है।

एसडीएम ने तेजी से फैल रही कांग्रेस ग्रास को पर्यावरण सहित आम जीवन के लिए बेहद खतरनाक बताया। इससे दमा, जुकाम, खांसी, खुजली समेत चमड़ी बीमारी, एलर्जी इत्यादि बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी घास बॉयोलॉजिकल प्रदूषण की एक बड़ी वजह है। वेस्ट इंडीज की पैदाइश इस घास का इंडीज समेत लेटिन अमेरिका में खात्मा हो चुका है परंतु पंजाब में इस घास के बीज फसलों के आदान प्रदान दौरान 1975 में आए थे और अब यह बहुत बड़े रकबे में फैल चुकी है।

बैठक के दौरान एसडीएम संजीव बांसल।