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पिंजौर के सिद्ध पीठ खड़ा पत्थर मंदिर में धूूूमधाम से मनाई जाएगी शिवरात्रि

6 वर्ष पहले
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पिंजौरकालका क्षेत्र अर्ध पहाड़ियों में बसा हुआ है। पुराने बुजुर्ग इस क्षेत्र को देवी देवताओं और पीर गुरुओं का स्थान कहते थे। आज भी क्षेत्र में बहुत से ऐसे परिणाम मौजूद हैं जो कि क्षेत्र को प्राचीन इतिहास से जोड़ने के साथ-साथ किसी समय यहां पर भगवान के आए होने का भी परिणाम दिखाते हैं। पिंजौर के पास ही नालागढ़ रोड़ पर गांव धमाला के नजदीक श्री सिद्व पीठ खड़ा पत्थर मंदिर जिसका अपना एक इतिहास है 100 साल से पुराने इस मंदिर में सैकड़ों सालाें से श्रद्वालुओ द्वारा धूमधाम से शिवरात्रि मनाई जाती रही है। इस बार भी मंदिर कमेटी और क्षेत्र के श्रद्वालुओं द्वारा 17 फरवरी को धूमधाम से शिवरात्रि मनाई जा रही है कमेटी के प्रधान सुरिन्द्र छिंदा वासुदेवपुरा और पुजारी पवन कुमार ने बताया कि 10 फरवरी को सुबह 9 बजे शिवपुराण आरम्भ हो गया। जिसका भोग 17 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन सुबह पड़ेगा। उसके बाद रात को चार पहर की पूजा होगी 18 फरवरी को सुबह 11 बजे भंडारे का आयोजन किया जाएगा प्रभु इच्छा तक भंडारा चलेगा रात को करीब 8 बजे मंदिर में जागरण का आरम्भ किया जाएगा जिसका भोग 19 को सुबह पड़ेगा।

गांव धमाला के किसान छित्रु सिंह के पूर्वजों की जमीन थी। एक किसान के खेत में एक पत्थर था इनका नौकर खेतो में हल चलाते समय इस पत्थर से दूर-दूर ही हल चलाता था क्योंकि जैसे ही हल इस पत्थर पर लगता तो हल की फाली ही टूट जाती। यह सिलसिला कई सालों तक चलता रहा एक बार किसान ने दुखी होकर इस पत्थर को निकालने का निर्णय किया और नौकर को हथौड़ा सबल आदि देकर खेतो में पत्थर निकालने के लिए भेज दिया परन्तु नौकर की अन्दर से पत्थर निकालने की इच्छा हुई और वापस गया। किसान ने उसे दोबारा भेजा। नौकर ने चारों ओर उसे निकालने का प्रयास किया तो पत्थर जमीन के नीचे दबने लगा जब सारे प्रयास असफल हुए। उसने हथौड़े सेवार किया तो खून के छींटे उस पर गए। इसकेे बाद उसने कई बार कोशिश की, लेकिन हरबार एेसा ही हुआ। उसने मालिक को बुलाया। मालिक ने कोशिश की तो उसमें से दूध निकलने लगा। तब गांव वालों ने कहा- कि यह जगह मंदिर बनाने के लिए छोड़ देनी चाहिए। इसके बाद यहां मंदिर बनाया गया।