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टॉय ट्रेन के 10 डिब्बों में सोलर पैनल लाइट्स
वर्ल्डहेरिटेज में शामिल कालका शिमला रेल खंड पर चलने वाली टॉय ट्रेन शाम ढ़लने के बाद पहाडों के बीच सोलर पैनल से जगमगाती हुई दिखाई देती हैं। क्योंकि देश में चलने वाली ट्रेन की लाइटें आदि सोलर पैनल से जलाने एंव बिजली की बचत करने के लिए शुरू किया गया सोलर पैनल पायलट प्रोजेक्ट कामयाबी की ओर बढ़ता जा रहा है। रेल विभाग ने यह पायलट प्रोजेक्ट विश्व धरोहर में शामिल कालका शिमला रेल सेकशन पर चलने वाली टॉय ट्रेन पर शुरू किया था। टॉय ट्रेन में करीब एक साल पहले कुछ ही डिब्बों पर सोलर पैनल लगाकर इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई थी और अब तक विभाग करीब 10 डिब्बों में सोलर पैनल लगा चुका है। जानकारी के अनुसार रेलवे नेटवर्क में बिजली की बडी भारी खप्त होती है। बिजली का इस्तेमाल गाडी को चलाने से लेकर एसी लाइटें आदि के लिए भी होता है। ऐसे में बिजली की बचत करने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेनों में लाइट आदि को सौर उर्जा से चलाने का प्लान तैयार किया था।
बाकी के डिब्बों में जल्द लगेंगी लाइट्स
जोप्लान बनाया गया, उसके तहत कालका शिमला के बीच चलने वाली टॉय ट्रेन को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए चूना गया था। इसका एक कारण यह भी था कि ठंडे इलाके में यह प्रोजेक्ट कितना ज्यादा कामयाब हो सकता है। लेकिन विभाग द्वारा शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट कामयाबी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। क्योंकि पहले शुरुआती दौर में चंद डिब्बों पर ही लगाया गया था और अब करीब १० डिब्बों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं , जो सुबह चलने वाली शिवालिक डिलकश तथा दोपहर को शिमला के लिए रवाना की जाने वाली हिमालयन क्वीन टॉय ट्रेन में जोडे गए हैं। ऐसे में टॉय ट्रेन के अन्दर शाम ढलने के बाद सोलर पैनल से ही रोशनी होती है। इस बारे में विभाग से बताया गया कि पहले गाडी के डिब्बों में बडी टयूब लाइटें लगी हुई थीं , लेकिन सोलर पैनल वाले डिब्बों में छोटी एंव सुन्दर लाइटें लगाई गई हैं और रोशनी भी अच्छी है। इसके अलावा जल्द ही शेष रहे डिब्बों में भी सोलर पैनल लगाए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट कामयाब होने से बडी लाइनों की गाडियों में भी सोलर पैनल लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा।