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फैक्टरी बंद हो गई तो जमीन पर दूसरा उद्याेग लगाए सरकार

6 वर्ष पहले
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कालकाहल्का का पिंजौर क्षेत्र अर्धपहाड़ी में बसा होने के कारण क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या सबसे बड़ी थी जिसको देखते हुए करीब 78 वर्ष पूर्व महाराजा पटियाला की रियासत में उस समय की सरकार ने एक समझौते के साथ सैकड़ो एकड़ जमीन अधिग्रहित कर उद्योग लगाने के लिए दी थी।

परन्तु उद्योग बंद होने के बाद इसकी भूमि को बेचने का मामला शुरू हो गया। जानकारी के मुताबिक नगर निगम पिंजौर जोन वार्ड 6 के अन्र्तगत पडऩे वाले गांव बीसीडब्ल्यू सूरजपुर में एसीसी सीमेंट कंपनी द्वारा केवल उद्योगिक गतिविधियों के लिए प्रयोग की जाने वाली 587 बीघा भूमि को मात्र 199 करोड़ में बेचने का विवाद फिर से उठ गया है। भूपेन्द्रा सिमेंट वर्करज यूनियन द्वारा 5 वर्ष पूर्व जमीन बेचे जाने पर आपत्ति भी जताई गई थी परंतु पूर्व की सरकार ने आपत्ति को अनदेखा करते हुए लगभग 600 करोड़ की भूमि को सस्ते में ही बेचने दिया जबकि 18 वर्ष पूर्व फैक्टरी से निकाले गए लगभग 800 कर्मचारियों का बकाया 45 करोड़ रुपए अभी देना बाकी है। कर्मचारियों ने प्रदेश में भाजपा की बनी नई सरकार के समक्ष फिर से उक्त मुद्दा उठाकर उद्योगिक प्रयोग वाली भूमि पर कोई अन्य उद्योग लगाने की मांग की है। गौरतलब है कि पर्यावरण नियमों के उल्लघंन और सरकार द्वारा भूमि की लीज ना बढ़ाने के कारण सन 1997 में सूरजपुर स्थित बीसीडब्ल्यू एसीसी सीमेंट फैक्टरी को बंद कर दिया गया था। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। सरकार को कुछ साेचना चाहिए।

1973में गांव में उद्याेग लगाने को दी थी जमीन: सन1937 में महाराजा पटियाला की रियासत में तत्कालीन सरकार ने एक समझौते के तहत गांव रामपुर सियुड़ी, सूरजपुर, रजिपुर की सैकड़ों एकड़ भूमि अधिग्रहित कर कंपनी को उद्योग लगाने के लिए दी थी। ,

समझौते के अनुसार शर्त रखी गई थी कि जब भी कंपनी फैक्टरी बंद करने का निर्णय लेगी तो सारी मशीनरी और भूमि राष्ट्र की संपत्ति बन जाएगी। लेकिन सभी नियमों को ताक पर रखकर 15 वर्ष पूर्व फैक्टरी की सारी मशीनरी को बेच दिया गया था और हरियाणा उद्योग विभाग निदेशालय ने कंपनी को भूमि मुबंई की एक बिल्डर कंपनी को बेचने की अनुमति दे दी थी।