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बरवाला के रिहौड़ गांव में दो दिन से पानी को तरसे लोग
सिटी रिपोर्टर| पंचकूला/कालका
पंचकूला जिले के एक गांव में पिछले दो दिनों से पानी नहीं रहा है। दो दिन से सैकड़ों परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। लोग अपने खर्च पर पानी के टैंकरों को ला रहे हैं। इसके चलते उन्हें कुछ राहत मिल रही है। बरवाला के रिहौंड गांव में सैकड़ों परिवार हैं। युवा यूथ क्लब के वाइस प्रधान राजू शर्मा ने बताया कि पिछले दो दिनों से गांव में लगे दो पानी के ट्यूबवेल खराब पड़े हैं। इसके चलते गांव में पानी ही नहीं रहा है। गांव के लोग अपने खेतों में लगे ट्यूबवेलों से पानी ढो रहे हैं। कुछ बरवाला से किराए पर पानी के टैंकरों को लेकर रहे हैं। इस बारें में पंचकूला प्रशासन से लेकर पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट भी कुछ नहीं कर रहा है। गांव में ही रहने वाले बिंदर, मिंकू, शशिभूषण, देविंद्र कुमार सहित दर्जन भर लोगों ने बताया कि इस बारें में कोई भी गौर ही नहीं करता है। एक माह से तो एक ट्यूबवेल खराब पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर अब दूसरा ट्यूबवेल भी खराब हो गया है। यह काम पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से किया जाता है, लेकिन पंचायत को जब से काम दिया है, तब से परेशानी रही है।
पंचकूला| सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में इलाज करवाने आने वाले मरीजों को नई परेशािनयों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में बने ए-ब्लाॅक में डायरेक्शन बताने वाले साइन बोर्ड नहीं लगाए हुए हैं। इसके कारण इलाज करवाने के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को इधर-उधर भटक कर ओपीडी ढूंढ़नी पड़ती है। उसके बाद मरीज का इलाज करवाना पड़ रहा है। इलाज के लिए अस्पताल में आने वाले मरीजों के परिजनों की मानें तो अस्पताल को विकसित करने के लिए तो प्रशासन कदम उठा रहा है, लेकिन अगर यहां मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की ग्राउंड रिपोर्ट उठाकर देखें तो पता चलता है कि आम आदमी को अस्पताल में इलाज करवाने के लिए कितने धक्के खाने पड़ते हैं। यहां प्रबंधन द्वारा किसी भी फ्लोर पर लोगों की जानकारी के लिए कोई साइन बोर्ड नहीं लगाया हुआ है, जिससे यहां अाने वाले मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं, इलाज करवाने के लिए आने वाले लोगों का कहना है कि जनरल अस्पताल में पहले सी-ब्लाॅक में ही लैब टेस्ट, मेडिसिन ओपीडी जैसी कई ओपीडीज होती थी, लेकिन जब से सी-ब्लाॅक से कई ओपीडीज के साथ-साथ अन्य वार्ड भी बिना साइन बोर्ड लगाए ही ब्लाॅक-ए में शिफ्ट कर दिए गए हैं। इसके कारण लोगों को ओपीडील ढूंढ़ने के लिए बिल्डिंग में धक्के खाने पड़ रहे हैं।
सवाल- बरवालाके रिहौंड गांव में एक ट्यूबवैल कई सप्ताह से खराब है, तो दूसरा भी अब खराब हो गया है, क्या आपको इस बारें में पता हैω
जवाब-नहींमुझे इस बारें में कोई भी जानकारी नहीं है, चलो पता करते हैं।
सवाल-क्याआपको पता नहीं है, कि ट्यूबवैलों से पानी नहीं रहा, लोग टैंकरों से पानी ला रहे हैं।ω
जवाब-मुझेक्या पता होगा कि लोगों के घरों में पानी नहीं रहा है, यह काम तो पंचायत का है। मेरा नहीं।
सवाल-सरकारने ट्यूबवैलों को चलाने की जिम्मेदारी पंचायत को दी है, लेकिन बाकी जिम्मेवारी तो आपकी है, आप क्यों मुकर रहे होω।
जवाब-नहींनहीं ऐसा नहीं है। मैं पता करता हूं। पंचायत ने इस बारे में मुझसे कुछ बता नहीं की। पता करता हूं।
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुकतना पड़ सकता है।
कालका |इसेसरकारीअस्पताल प्रशासन की लापरवाही कहें या बंदरों का उत्पात। चाहे कुछ भी हो इसका खामियाजा अस्पताल में दाखिल मरीजों सहित अस्पताल में आने वाले लोगों को भुगतना पड़ सकता है। अस्पताल में उपलब्ध पेयजल को पहले बंदर चैक करते हैं। कालका के सरकारी अस्पताल में शहर सहित पिंजौर, परवाणू, टीपरा, बिटना, टगरा क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचे हैं। सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाने के दावे करता है, लेकिन कालका अस्पताल की छत पर रखी पानी की खुली टंकिया इन दावों की पोल खोल रही हैं। अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकियों के ढक्कन खुले पड़े रहने के कारण बंदर टंकियों में मुंह मारकर अपनी प्यास बुझाते हुए दिखाई देते हैं।