पिंजौर-नालागढ़ हाईवे-21 पर जाम हुआ आम
अव्यवस्था
पिंजौर-नालागढ़रोडएनएच-21ए को केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन एवं राजमार्ग ने फोरलेन बनाने की योजना तैयार की थी, लेकिन काम शुरू होने से यहां जाम की समस्या बढ़ती जा रही है। एनएचएआई विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिंजौर से हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ तक करीब 35 किलोमीटर एरिया है जिसमें बद्दी तक 20 किमी क्षेत्र हरियाणा में पड़ता है।
पिंजौर मेन बाजार में से बद्दी और नालागढ़ का उद्योगिक भारी वाहन अधिक संख्या में गुजरता है, जिससे पिंजौर में से प्रतिदिन लगभग 30 हजार से ज्यादा वाहनों की आवाजाही होती है। पिंजौर मेन बाजार में सड़क की चौड़ाई मात्र 8 से 9 मीटर नालागढ़ रोड मॉडल टाऊन रेलवे फाटक पर मात्र 7 मीटर और लोहगढ़ की सुखना नदी पर केवल 6 से 7 मीटर तक ही है। पिंजौर क्षेत्र में रोजाना जाम लगने का कारण भी यही है। क्योंकि नदी पर बना हुआ पुल भी लगभग 40 वर्ष पुराना और मात्र 20 फुट तक ही चौड़ा है। प्रतिदिन इस मार्ग पर अनेक दुर्घटनाएं होती हैं। कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। इसके समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने सूरजपुर से पिंजौर-सुखोमाजारी बाईपास के निर्माण के लिए एमरजेंसी क्लॉज के तहत विगत वर्ष 2008 में लगभग 250 एकड़ भूमि को अधिग्रहित किया था। सूरजपुर से पिंजौर के एविएशन क्लब बसौला तक प्रस्तावित बाईपास निर्माण के बाद ही समस्या का समाधान हो सकता है। इसके अलावा लगभग 11 हजार एकड़ भूमि में पिंजौर-कालका अर्बन कॉम्पलेक्स भी विकसित किए जाने की योजना है। इसका ट्रैिफक लोड भी इस पर पड़ेगा। इसलिए जीरकपुर-शिमला एनएच 22 पर स्थित सूरजपुर झज्जरा नदी के बराबर से उक्त बाईपास आरंभ होगा। रेलवे लाइन को पार करते हुए सिविल एविएशन क्लब पिंजौर बसौला के सामने एनएच-21 तक बनाने की योजना है। ताकि बद्दी के अलावा पिंजौर अर्बन कॉम्पलेक्स के ट्रैफिक को पिंजौर के बाजार से होकर गुजरना पड़े। प्राप्त जानकारी के मुताबिक चारमार्गी सड़क के साथ-साथ ही उक्त बाईपास का निर्माण भी करने की योजना पहले थी। हूडा विभाग द्वारा भूमि लगभग 66 करोड़ रुपए का मुआवजा देकर अधिग्रहित किया गया है। पिंजौर-नालागढ़ तक के प्रस्तावित फोरलेन मार्ग जो हरियाणा और हिमाचल में लगभग 35 िकमी तक लंबा होगा के निर्माण के साथ ही 7.5 किलोमीटर लंबा सूरजपुर पिंजौर-सुखोमाजरी बाईपास भी इसी में शामिल कर लिया गया था।
एनएच-21ए पर फोरलेन का काम शुरू होने से यहां जाम की समस्या बढ़ती जा रही है।
एनएचएआई की फोरलेन बनाने की योजना ठंडे बस्ते में