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हरियाणा में भी 100 एकड़ के प्लांट पर खनन की अनुमति हो

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | पिंजौर

पिछलेकरीबचार वर्ष से ज्यादा हो गए नदियों, बरसाती नालों में खनन गतिविधियां बंद होने के कारण नदियों में रेत, बजरी आदि की गाद एकत्र हो चुकी है। इससे पिंजौर क्षेत्र की आधा दर्जन नदियां ओवरफ्लो हो चुकी हैं और बरसाती नाले भी मलबे से अटे पड़े हैं। मौजूदा बरसात में पहाड़ों का मलबा नदियों में और आया तो आसपास के गांवों में बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। इतना ही नहीं भवन एवं अन्य निर्माणों से जुड़ी सामग्री भी ढाई से तीन गुना महंगी हो गई है, जिससे आम जनता को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। सरकार को खनन से प्रत्येक वर्ष होने वाले अरबों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। खनन से जुड़े हजारों मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। कालका विधानसभा से प्रत्याशी रहे सुदेश शर्मा ने हरियाणा सरकार से मांग करते हुए कहा है कि बाढ़ से बचाने के लिए पंजाब की तर्ज पर 100-100 एकड़ के प्लॉटों पर खनन की अनुमति प्रदान की जाए, जिससे केंद्रीय पर्यावरण विभाग से खनन की अनुमति लेने की अवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण से जुड़े रेत, बजरी आदि का रेट जो 12 से 13 रुपए फुट था, वही अब 35 से 40 रुपए प्रति फुट मिल रही है। लोगों को मजबूरन पंजाब, हिमाचल आदि क्षेत्रों से रेत, बजरी मंगवानी पड़ रही है, जो मंहगी पड़ती है। इससे हरियाणा का पैसा पड़ौसी राज्यों को लाभ पहुंचा रहा है। सामग्री महंगी होने के कारण केवल आम व्यक्ति के घर के निर्माण का सपना अधूरा रह गया है, वहीं दूसरी ओर पिंजौर, कालका सहित पूरे क्षेत्र में सरकारी कार्य भी नामात्र हो पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महंगाई होने से भवन सामग्री महंगी होने के कारण नदियों में चोरी-छिपे खनन की वारदातें बढ़ रही हैं और पुलिस एवं प्रशासन को अलग से खनन की रोकथाम की ड्यूटी करनी पड़ रही है। स्टोन क्रशरों की अरबों की मशीनरी बेकार पड़ी है।