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पेरीफेरी एक्ट क्षेत्र के विकास पर लगा ग्रहण

7 वर्ष पहले
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1952न्यूपंजाब पेरीफेरी कंट्रोल एक्ट चंडीगढ़ के निर्माण के समय चारों ओर हरियाली एवं योजनागत के निर्माण के दृष्टिगत बनाया गया था। चंडीगढ़ के चारों तरफ आसमानी दूरी 10 मील (रेडियस) कोई निर्माण बिना शहरी ग्रामीण योजना विभाग की अनुमति बनाना गैर कानूनी था।

1952 न्यू पंजाब पेरीफेरी कन्ट्रोल एक्ट के अनुसार कालका क्षेत्र के 102 गांव आते थे। लेकिन हरियाणा के गठन के पश्चात 1972 में शहरी ग्रामीण योजना विभाग के गलत सर्वे के कारण कालका क्षेत्र के 52 गांव और शामिल कर दिए गए, जबकि पंजाब सरकार के रिकाॅर्ड के अनुसार अभी भी कालका क्षेत्र के 102 गांव पेरीफेरी एक्ट के अधीन है। कालका क्षेत्र के गांव खोखरा गांव से गांव कोट बिल्ला तक पेरीफेरी एक्ट के अधीन है।

विजय बंसल ने बताया कि उन्होंने 2010 में इस अधिसूचना को लागू करवाने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उसके हुड्डा सरकार ने 2012 में विधानसभा में 2003 की अधिसूचना को रद्द कर दिया था।

2003 में 1952 पेरा-फेरी एक्ट में उस समय चौटाला सरकार ने संशोधन करके 60 प्रतिशत लाल डोरा बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना को तो चौटाला सरकार ही आगे रही कांग्रेस की हुड्डा सरकार ने लागू किया।

विजय बंसल ने हरियाणा सरकार को ज्ञापन सौंप कर मांग करते हुए कहा कि कालका क्षेत्र के लिए राजस्व विभाग की कमेटी गठित करके लाल डोरे की सीमा निश्चित की जाए केन्द्र सरकार द्वारा जैसे अनुपयोगी एक्ट समाप्त किए जा रहे है वैसे ही इस पेराफेरी एक्ट को भी समाप्त करना चाहिए।

कालका क्षेत्र में भी कई हजार मकानों के निर्माण हो चुके है क्योंकि बद्दी, बरोटीवाला, पंचकूला, नालागढ़, परवाणू, मोहाली, डेराबसी औद्योगिकरण के कारण इस क्षेत्र की आबादी कई गुणा बढ़ गई है। कालका क्षेत्र में 1902 के पश्चात बंदोबस्त नहीं हुआ और ही लाल डोरा बढ़ाया गया।

पेरीफेरी एक्ट के कारण कालका क्षेत्र के विकास पर ग्रहण लगा हुआ है क्योंकि पेरीफेरी एक्ट के कारण कोई निर्माण एवं विकास कार्य नहीं हो सकता है। हरियाणा सरकार ने पिंजौर ब्लाक को कई बार औद्योगिक पिछड़ा ब्लाक घोषित किया परन्तु पेरीफेरी एक्ट के कारण कोई उद्योग नहीं लग सका।