लगे हैं कई तरह के फूल
पांच लोगों ने मिलकर सुधारी पार्क की हालत
1976मेंफेज-5 स्थित 10 मरला कोठियों के बीच बने पार्क की हालत इतनी खस्ता था कि लोग यहां पर सैर करने के बजाय इससे दूर भागते थे। कारण था पार्क में जंगली घास कांटेदार झाड़ियां थी, जिसकी वजह से यहां घूमने का मन नहीं करता था। लेकिन फिर पांच लोगों ने बीड़ा उठाया और जंगल बन चुके पार्क को एक सुंदर पार्क बना दिया। अब यहां झाड़ियाें की जगह ग्रीनरी है।
^हर साल पार्क के चारों तरफ लगी सारी रेलिंग को पेंट करवाया जाता है। बेंचों को भी समय िसर मेंटेन करके पेंट किया जाता है। -लवकुमार
^ फुटपाथ टूटे होने की वजह से बुजर्ग गिर जाते थे और इस परेशानी को भी वेलफेयर के सदस्यों द्वारा दूरी िकया गया। -रोजी,क्षेत्र निवासी
करीब 6 साल पहले कंट्रीब्यूशन से पार्क को मेंटेन करने के लिए रजनीश कुमार, प्रीतपाल सिंह ढ़ींढसा, कृष्ण उप्पल, रविदंर सोढ़ी, सतिवंदर सिंह ने बड़ी उठाया था। इनकी देखरेख में यहां नए पौधे, फूल, झूले, रात को बिजली का बेहतर प्रबंध किया गया है।
लव कुमार
फेज-5 स्थित 10 मरला कोठियों के बीच बने पार्क की हालत बहुत खराब थी, लेकिन एसोसिएशन ने मिलकर यहां काम किया। खुद के पैसे लगाकर यहां काम करवाया। बड़ी-बड़ी झाड़ियों को कटवाया और यहां बैठने और घूमने लायक पार्क बना दिया। आज यहां बच्चे भी खेलते हैं, और बड़े-बुजुर्ग सैर भी करते हैं।