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- बुजुर्ग पिता ने कहा कातिल बहू को मिली उम्रकैद पर साजिश में शामिल दोषी की बहन को क्यों छोड़ िदया
बुजुर्ग पिता ने कहा-कातिल बहू को मिली उम्रकैद पर साजिश में शामिल दोषी की बहन को क्यों छोड़ िदया
पिछले8 साल से बेटे की कातिल को सजा दिलाने की लड़ाई लड़ रहा था। बुजुर्ग मेवा सिंह ने कहा कि पता था एक एक दिन बेटे की कातिल प|ी साली को सजा मिलेगी। मेरे बेटे मनमोहन को जहर देकर मारने वाली उसकी प|ी मनप्रीत कौर को उम्रकैद मिली। कोर्ट के फैसले से खुश हूं, लेकिन दुख इस बात का है मनप्रीत की बहन बलजीत कौर साजिश रचने वाली बराबर की हिस्सेदारी थी उसको भी सजा होनी चाहिए थी।
पौतीथी चशमदीद गवाह : बुजुर्गमेवा सिंह ने बताया कि उनकी पौती इस पूरे प्रकरण में चश्मदीद गवाह थी। उसने अपनी मां मनप्रीत कौर मासी बलजीत कौर को छिपकली मारकर कचूमबर बनाते हुए देखा और उसके बाद कैसे कोल्ड ड्रिंक और शराब में घोलकर मनमोहन सिंह को पिलाई। पुलिस को सबूत भी दिया, लेकिन पुलिस ने फिर भी कई साल लगा दिए।
मेवा सिंह ने बताया कि साल 2006 में 14व 15 की रात को उनके बेटे मनमोहन सिंह की मौत हुई थी। उस रात मनमोहन की तबीयत िबगड़ गई और उसे कुछ हो गया तो तुरंत पास के अस्पताल ले गए। वहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संस्कार वाले दिन बहू पर शक हुआ थ।
संस्कार वाले दिन हुआ शक
बुजुर्ग मेवा सिंह ने बताया कि सच्चाई सामने लाने के लिए उनको 8 साल लग गए। उनको पता है कि कैसे अपने बेटे मृतक मनमोहन सिंह को न्याय दिलवाने के लिए एक लड़ाई लड़ी। उन्होंने पिता का फर्ज निभाने के साथ साथ पुलिस की डयूटी भी निभाई।
पिता का फर्ज निभाया
एक ऑफिसर ने मनप्रीत को फोन कर रिकॉर्डिंग की ताकि सैंपल फोरेंसिक लैब भेजे जा सके। दोनों आवाजें मनप्रीत की थीं। पुलिस के साथ मिल मिलाकर मनप्रीत ने पता नहीं कैसे केस से नाम निकलवा लिया। मामला ह्यूमन राइट के पास पहुंचा और फिर नामजद करवाया।
5 साल बाद एफआईआर