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गमाडा ने 1000 अलॉटीज को 14 साल बाद भी नहीं दिया प्लॉट्स का पजेशन

7 वर्ष पहले
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सेक्टर-76से80 के अलॉटीज ने गमाडा ऑिफस के सामने शनिवार को धरना दिया। धरना देने की नौबत इसलिए आई कि गमाडा के सीए को सेक्टर-76 से 80 प्लॉट अलॉटमेंट संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने 10 दिसंबर तक मिलने का समय मांगा था। 2 दिसंबर को यह सदस्य लिखित रूप में सीए ऑिफस को पत्र देकर आए थे कि 10 दिसंबर तक उन्हें बुलाया गया तो वह धरना देंगे। उनकी बात मानी गई तो वह 16 जनवरी से भूख हड़ताल पर बैठेंगे। कमेटी की मांग है कि गमाडा के अधिकारी जानबूझ कर एक हजार प्लॉट धारकों को प्लॉटों का पजेशन नहीं दे रहे हैं। अधिकारियों को मिलकर यही बताना है कि कहां-कहां पर जमीन पड़ी है और प्लॉट पड़े हैं, जिनका पजेशन देकर लोगों को राहत दी जा सकती है। लोग 14 साल से प्लॉट पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सुच्चा सिंह ने बताया कि साल दो हजार में गमाडा ने स्कीम निकाली थी जिसका पजेशन दिसंबर 2002 में दिया जाना था, लेकिन 14 साल गुजर जाने के बाद भी लोगों को पजेशन नहीं मिला है। लोगों का कहना है कि अधिकारी कोर्ट में जमीन को लेकर स्टे होने के चलते सभी को पजेशन नहीं दे रहे हैं। इस स्कीम में 3931 लोग सफल आवेदक माने गए थे। जिनमें से एक हजार लोग अभी भी ऐसे हैं जिन्हें जमीन को पजेशन नहीं मिला है। लोगों के संघर्ष के चलते 2009 के बाद पजेशन देना शुरू किया था। लोगों की मांग थी कि स्टे की 102 एकड़ जमीन को छोड़कर शेष जमीन में प्लॉट काटे जाएं।

102एकड़ पर स्टे को 200 एकड़ में बताया: संघर्षकमेटी का कहना है कि 76 से 80 के सभी पांच सेक्टरों में से मात्र 102 एकड़ जमीन पर कोर्ट का स्टे है। जबकि गमाडा के अधिकारी 200 एकड़ पर स्टे कह रहे हंै कमेटी की मांग है कि जिस प्रकार से स्टे की जमीन को छोड़कर शेष जमीन पर प्लॉट काटकर लोगों को दिए गए हैं उसी प्रकार से शेष जमीन को भी डेवलप कर लोगो को दिया जाए। स्टे के चलते इंस्टीट्यूशंस जमीन पर भी प्लॉट काटे जा सकते हैं। बाद में जब स्टे टुट जाए या केस हल हो जाए तो उसके बाद इस जमीन को इंस्टीट्यूशंस के लिए डेवलप किया जा सकता है।

धरना देने आए 76 से 80 प्लाॅट अलॉटमेंट संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने कहा कि उनकी बात मानी गई तो 16 जनवरी से भूख हड़ताल पर बैठेंगे। फोटो: भास्कर

^सभी लोग दफ्तर में िमलने आते हैं उन्हें कुछ ही मिंटो में फारिक कर दिया जाता है और उनकी बात सुनी जाती है। संघर्ष कमेटी का