एफआईआर से अलग बयान दिए कोर्ट में
नयागांवथाने पर 10 जनवरी 2013 को जो रात के समय हमला हुआ था उस केस में पुलिस अपने ही बयानों में घिरती नजर रही है। पुलिस ने एनअारआई समेत जिन 10 युवको को थाने पर हमला, हत्या के प्रयास अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था उस एफआईआर में दर्ज बयानों में ही पुलिस कर्मी उलझते जा रहे हैं। इस केस में शुक्रवार को जिला अदालत में तत्कालिन मुंशी शिकायकत्र्ता हैडकांस्टेबल धर्मचंद के बयान कलमबद्ध किए गए। इन सब सवालों में पुलिस कर्मी अपने आप फंसते जा रहे हैं। वहीं एनआरआई अमित ने खरड़ कोर्ट में भी उसके भविष्य को नष्ट करने के लिए तत्कालिन एसएचओ समरविनीत, एसपी डी बलविंदर सिंह, एसपी सिटी-1 स्वर्णदीप सिंह, डीएसपी राजिंदर सिंह सोहल, एएसआई हाकम सिंह, जरनैल सिंह, हैडकांस्टेबल अजीत सिंह, एचसी सुरजीत िसंह, इंस्पेक्टर चीमा, हैडकांस्टेबल धर्मचंद, दो डॉक्टर जिन्होंने झूठा मेडिकल बनाया था के खिलाफ शुक्रवार को ही केस दर्ज करने के लिए याचिका दायर की है। इन सब मामलो में पुलिस को आधार अगर बनाया जाए तो पुलिस की ओर से केस कमजोर हो रहा है।
{जब हमला हुआ उस समय हमले के आराेपी एनआरआई अमित सैनी ने जो वीडियो बनाई उसमें पुलिस की जिप्सी थाने के अंदर दिख रही है। जबकि एफआईआर में लिखा है कि उस समय एसएचओ समरविनीत अपनी टीम के साथ एरिया मंे दौरे पर था।
{ एफआईआर में लिखा कि 15 से 20 युवकों ने थाने पर हमला किया, लेकिन बयानों में धर्मचंद ने कहा कि 5/6 युवक थे।
{आधे घंटे की उस दिन की बनाई गई वीडियो जिसमें संदीप संधू जिसको पुलिस ने उठा लिया था और उसके घरवाले थाने में पता करने गए थे वह बेहाश थाने के बाहर फैंक दिया गया था। संधे के घरवाले पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे थे कि उसको पानी दे दो। जल्दी से उनके बेटे को अस्पताल ले चलो। लेकिन पुलिस ने गेट बंद कर दिया हुआ था। धर्मच्ंद ने कहा कि उसे वीडियो में यह साफ नहीं दिखाई दे रहा। जबकि वीडिया पूरी तरफ से साफ दिख रही है।
{ एफआईआर में लिखा है कि आरोपी युवक हत्यारों के साथ थाने आए थे लेकिन धर्मचंद ने कोर्ट को बताया कि किसी भी आरोपी के पास कोई भी हथियार नहींे था।
{वहीं इस केस में पुलिस फोटोग्राफर बबलजीत सिंह कोर्ट में पहले ही बयान दे चुका है कि संतरी को फोटो में लाने के लिए सबूतों से छेड़छाड की गई थी।