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निगम के लिए परिषद की समय से पहले बली दे दी
शहर को नगर निगम का दर्जा देने के लिए सरकार ने तैयारी कर ली थी। उससे पहले शहर की नगर परिषद काम कर रही थी। इस परिषद पर कांग्रेस का कब्जा था, इसके चलते नगर परिषद को अपने कार्यकाल पूरा करने से करीब नौ महीने पहले भंग कर 1 जनवरी 2011 को नगर निगम गठन किया गया था। इसके गठन के बाद निगम का कमिश्नर आरजी तौर पर कभी डीसी तो कभी गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर को लगा दिया। सितंबर 2013 में निगम को कमिशनर मिला। इन सब के बीच रोचक तथ्य यह भी है कि सरकार बार-बार नगर निगम चुनाव करवाने की बात करती रही लेकिन करीब चार साल एक महीने बाद नगर निगम चुनाव का ऐलान किया गया शहर के लोग चार सालों से लोक प्रतिनिधि नहीं चुन पाए। उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर रखा गया।
^मोहाली की इंडस्ट्रीज में सुरक्षा को लेकर उचित प्रबंध नहीं हैं। इंडस्ट्रियल एरिया में कई कॉल सेंटर्स में दिन रात शिफ्ट्स लगती है। रात के समय भी लड़के-लड़कियां आते जाते हंै। उनकी सुरक्षा हो। तो स्ट्रीट लाइटों का उचित प्रबंध है और सड़कें ठीक हैं। इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। इकबालसिंह, को-चेयरमैन,एमआईए
^ पार्षद जो भी हो इमानदार हो। अक्सर देखा जाता है कि नेता लोग चुनावों के दिनांे लोगों के सामने आते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। जो भी इलाके के विकास के लिए चुना जाए, वह ईमानदार होना चाहिए और लोगों की भलाई के लिए हमेशा आगे आए। -शशिबाला
नगर निगम चुनाव चार साल बाद आए हैं। यह अच्छी बात है कि इलाके की देखभाल करने के लिए कोई नेता सामने आएगा और वार्ड का सुधार करेगा। हमारे वार्ड के एचई क्वार्टर काफी पुराने हो चुके हंै। इन क्वार्टरों को अपग्रेड करवाना चाहिए, ताकि कोई बड़ा हादसा हो सके।
-अरुणशर्मा
^डेवलपमेंट के लिए पहले वार्ड के लोगों के साथ मीटिंग की जाएगी, उसके बाद फैसला होगा। प्राथमिकता के आधार पर प्रॉब्लम हल होंगी। निर्मलकौशल, कांग्रेस उम्मीदवार
^ घर-घर जाकर सर्वे किया है। पार्किंग आवारा कुत्ताें की समस्या से ज्यादा परेशानी है। अगर जीतता हूंं तो सबसे पहले इन दोनों समस्याओं का हल निकाला जाएगा। सैहबीआनंद, बीजेपी उम्मीदवार
^ऐसे इलाके में पार्किंग की समस्या भी सबसे अहम है। पार्किंग के कारण हर दिन झगड़े होते रहते हंै। लोग कहीं भी गाड़ियां पार्क कर देते हैं। जो पार्षद बने, पार्किंग की समस्या का हल निकाले। जरनैलकौर
^हमारे इलाके में आवारा कुत्ते ज्यादा हैं। वे अक्सर गाड़ियों के पीछे दौड़ते हैं और भौंकते हैं। इनके कारण कई बार एक्सीडेंट हो चुके हैं। इसके बावजूद भी नगर निगम की ओर से कोई सुध नहीं ली गई है। जीवनशर्मा
इस वार्ड में फेज-7 आता है, जो सबसे पॉश एरिया माना जाता है।
फेज-7 के एचई क्वार्टरों में आवारा कुत्तों वाहनों की पार्किंग की समस्या अब से नहीं, कई सालों से है। पार्किंग को लेकर लोगों में आए दिन झगड़े होते हैं। लोग अक्सर फुटपाथों सड़कों पर अपनी गाड़ियां पार्क कर देते हंै, इससे झगड़ा होता है। आवारा कुत्तों का भी आतंक है। लोगों की मांग है कि इन दो समस्याओं का हल पहल के आधार पर निकाला जाए।
फेज-7 के ठीक साथ चंडीगढ़ का इलाका भी लगता है।
वार्ड एरिया
पॉश इलाके के लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार वार्ड के सुधार के अफसरों को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 4 साल बाद निगम चुनाव आए हैं। लाेगों की निगाहें इस पर हैं। पार्षद जो भी हो लोगों के काम करे।
^चार साल बाद नगर निगम चुनाव आए हैं। जो कोई भी इस वार्ड का पार्षद बनता है, वह इलाके की अच्छे तरीके से देखभाल करे और लोगों के हित में फैसला ले। पार्षद को समय समय पर विकास करवाना चाहिए। ऐसे में इलाके की संुदरता भी कायम रहेगी। -ताहिल
^बचपन से बड़े-बुर्जुगों से सुनता आया हूं कि वोट कीमती है। मुझे पहली बार अपना कीमती वोट डालने का मौका मिला है और मैं बहुत खुश हूं। मैं अपना वोट उसी उम्मीदवार को दूंगा तो निष्पक्ष होगा और आम लोगों की समस्याओं का हल निकालेगा। नेता किसी भी पार्टी का हो, बिल्कुल निष्पक्ष हो। -रिषभकंवर
वोटर
2600
जनसंख्या
4000