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स्वाइन फ्लू : पूरी तरह से जागरूक नहीं हंै जिले के लोग
प्रदेशमेंदिन-ब-दिन फैल रहे स्वाइन फ्लू के कारण जिले के लोगों में भी सहम का माहौल है। जिले में अभी तक कोई स्वाइन फ्लू का केस सामने तो नहीं आया, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए जिले के हर शहर में मेडिकल टीमों तथा आइसोलेशन वार्ड का गठन किया जा चुका है वहीं विभिन्न प्राइवेट अस्पतालों में भी आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं तथा जिले में स्वाइन फ्लू रोधक दवाई भी उपलब्ध है। स्वाइन फ्लू के बारे मंे लोगों ने प्रशासन से घर-घर जाकर विशेष टीमों द्वारा जांच करने की मांग की। भास्कर द्वारा जब इस संबंध में लोगों से पूछा गया तो पता चला कि लोगों में पूरी तरह से जागरूकता नहीं है। वहीं शहर के कुछ पढ़े-लिखे वर्ग से भी उनकी राय जानी गई।
पर्सनटू पर्सन हो सकता है स्वाइन फ्लू: सत्याल
स्वाइनफ्लू के संबंध में सरकारी काॅलेज रोपड़ के प्रो. बीएस सत्याल ने बताया कि स्वाइन फ्लू संबंधी लोगों को खुद जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि खांसी, जुकाम तो स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं ही, लेकिन इसके साथ स्वाइन फ्लू पर्सन टू पर्सन भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को मामूली से लक्षण दिखने पर भी तुरंत डाॅक्टर से अपनी जांच करवानी चाहिए तथा कोई भी छोटी सी लापरवाही जान के लिए खतरा साबित हो सकती है। प्रो. सत्याल ने लोगों से भीड़ भाड़ वाले क्षेत्र में जाने, बाहर खाना खाने तथा छोटा सा भी स्वाइन फ्लू का लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाने के लिए कहा।
सामान्यस्वाइन फ्लू घातक नहीं, जांच जरूरी: डाॅ. परमार
स्वाइनसंबंधी पूरी जानकारी देते हुए सीनियर सर्जन डाॅ. आरएस.परमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक वायरल बीमारी है। उन्होंने बताया कि इसको एच1एन1 वायरस के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि यह इन्फ्लूएंजा वायरस के कई सब टाइप है तथा इनमें से एक सब टाइप एच1एन1 वायरस है। बताया कि स्वाइन फ्लू सबसे पहले सुअरों में पाया गया था। उसके बाद इस वायरस ने इंसानों को भी अपने चपेट में लेना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस वायरस से संक्रंमित व्यक्ति के संपर्क में आने से यह बीमारी फैलती है। उन्होंने बताया कि सामान्य स्वाइन फ्लू इतना घातक नहीं होता ,लेकिन अगर लापरवाही बरती जाए तो जान भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि यह वायरस मरीज को छूने, छींकने उपरांत ड्रापलेट्स, हवा से फैलता है। उन्होंने बताया स्वाइन फ्लू होने पर समय पर टेमी फ्लू दवा से इसका असर घट जाता है।
नहींपता स्वाइन फ्लू के पूरे लक्षण: सुशील कुमार
सुशीलकुमार ने बताया कि स्वाइन फ्लू संबंधी उनको ज्यादा जानकारी तो नहीं है लेकिन उनको काफी दिनों से बाॅडी पेन की शिकायत है। जब उनको पता चला की बाॅडी पेन भी स्वाइन फ्लू का एक लक्षण है तो उन्होंने बताया कि उनको इस संबंध में जानकारी नहीं थी लेकिन अब वह अपनी डाॅक्टरी जांच करवाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर वह अब स्वाइन फ्लू के संबंध में पूरी तरह से जागरूक नहीं थे।
लोगोंमें जागरूकता की अधिक जरूरत: लौंगिया
ज्ञानीजैल सिंह नगर वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अवतार सिंह लौंगिया ने कहा कि सेहत प्रशासन को घर-घर जा कर इस संबंध में लोगों को जागरूक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू के लक्षण भी आम रोजाना बीमारियों जैसे जिसको लोगों द्वारा हल्के में लिया जा रहा है तथा इस संबंधी जागरूक होना बहुत जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से स्पेशल टीमों द्वारा सर्वे करवाने की मांग की ताकि किसी लापरवाही के चलते जानी नुकसान हो। उन्होंने लोगों से भी इस संबंधी जागरूक होने की मांग की।
क्याहंै लक्षण
लक्षणोंसंबंधी जानकारी देते हुए डाॅ. परमार ने बताया कि बाडी पेन, जुकाम, गले में खराश, नाक का लगातार बहना, नाक, या खांसी के दौरान खून आना, जी मचलना, उल्टी आना, डायरिया स्वाइन फ्लू के लक्षण हंै। वहीं उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू सर्दी में ज्यादा फैलती है। उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू वायर करीब 5 से 10 दिनों में पूरा असर करता है तथा रेस्पिरेटरी सिस्टम या हार्ट आदि पर अटैक करता है जिससे हार्ट फेल भी हो सकता है। स्वाइन फ्लू संबंधी जानकारी लेने के जिले के विभिन्न एसएमओज के नंबर ये हैं :-
रोपड़-9915570066
नंगल-9417333094
नूरपुरबेदी-9478158476
मोरिंडा-8558876030
लोग इसका भी ध्यान रखें
{हाथों को बार-बार साबुन या एंटी बैक्टीरियल सॉल्यूशन से धोएं।
{ सार्वजनिक सामान छूने और उपयोग करने के बाद हाथ धोएं।
{ नाक- मुंह को हमेशा मास्क से ढके रहें।
{ भीड भरी जगहों में जानें से बचें।
ये बरतें सावधानियां
{पालक, मूली, गाजर, शकरकंदी, साग (बथुवा, मेथी), इनका इस्तेमाल कम से कम करें।
{ संक्रंमण के दौरान खाने की डोज सामान्य से कम करें
{ चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक आदी का उपयोग करें
{ बुखार होने पर मालिश या फिर एक्सरसाइज बिल्कुल नहीं करें।
{ अंगुली की मदद से प्रतिदिन तीन बार नाक के दोनों नथूनों में दो बंूद सरसों का तेल लगाएं, ऐसा करने से तेल नाक के अंदर सुरक्षा क्वच की तरह कार्य करेगी और बाहरी विषाणु से सुरक्षित भी रखेंगे।
{ तुलसी के सूखे पत्तों का आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम लें
{ आधा या फिर एक चम्मच अदरक के रस में एक चुटकी काली मिर्च चूर्ण और आधा चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लें
{ गिलोय तने का रस चार छोटी चम्मच (20 मि.ली.) सुबह शाम लें। सूखी गिलोय चूर्ण एक छोटी चम्मच गर्म पानी मंे मिलाकर लें।
अगर आपको स्वाईन फ्लू है या फिर डॉक्टरों द्वारा उसके होने की संभावना बताई गई है, तो आप आयुर्वेदिक नु्स्खों का इस्तेमाल कर स्वाइन फ्लू के वाइरस पर अंकुश लगा सकते हैं। जी हां, ये नुस्खे कुरुक्षेत्र स्थित मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों द्वारा किए गए रिसर्च के बाद इजाद किए गए हैं। इसके तहत तुलसी, सरसों का तेल समेत कई आयुर्वेदिक सामग्री का इस्तेमाल कर आप फ्लू के वायरस को खत्म कर सकते हैं। हरियाणा आयुष विभाग की डायरेक्टर डॉ. संगीता ने बताया कि कुछ दिन पहले ही कुरुक्षेत्र के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की टीम द्वारा प्रदेश मे बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मरीजों को देखते हुए यह रिसर्च किया गया है। रिसर्च के दौरान कुछ पत्तियों आयुर्वेदिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्वाइन फ्लू के वायरस पर अंकुश लगाने में सफलता हासिल हुई।