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मिनी एयरपोर्ट बनाने की मांग

7 वर्ष पहले
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हरियाणाकापहला सिविल एवियेशन क्लब और पायलट ट्रेनिंग इंस्टीट्यट पिंजौर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अपग्रेड करने की मंजूरी नहीं मिल पाई है। लेकिन पिंजौर वासियों ने पिंजौर के इस सेंटर को मिनी एयरपोर्ट या कारगो एयरपोर्ट बनाने की मांग की है जिससे पिंजौर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा। 4 वर्ष पूर्व यहां पर लोगों के लिए उड़ान की ट्रेनिंग को आंरभ किया गया था जिसमें ग्लाईडिंग और छोटे एयरक्राफ्ट को उड़ाने की ट्रेनिंग छात्रों को देनी शुरू की थी। पांच वर्ष पूर्व तो सरकारी उपेक्षा के कारण केवल यहां पर ट्रेनिंग और सभी प्रकार की उड़ाने तक बंद कर दी गई थी। मगर कुछ समय से यहां ट्रेनिंग तो शुरू हो गई मगर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए अभी तक उड़ाने शुरू नहीं की गई। यहां के स्टॉफ की सेलरी भी लेट मिलती हैं। क्योंकि सरकार द्वारा इस केन्द्र के लिए अलग से कोई ग्रांट नहीं दी जाती यहीं से रैवन्यू प्राप्त कर उन्हंे अपना खर्चा निकालना होता है। लोगों की मांग है कि सरकार इस इंस्टीट्यट को अपने अधीन लेकर इसे आईटीआई और पोलिटेक्निक की तर्ज पर चलाए और यहां पर कारगो एयरपोर्ट का निर्माण करे। क्योंकि चंडीगढ़ का एयरपोर्ट काफी व्यस्त रहता है। इस हवाई अड्डे से सरकार को भी काफी राजस्व प्राप्त होगा क्योंकि साथ लगते बद्दी, नालागढ़ और परवाणू औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपति अपने उद्योगों के लिए यहीं से रॉ-मैटेरियल लाने के साथ-साथ यहां पर विशेषकर विदेशी टूरिस्ट को भी आकृषित किया जा सकेगा। केवल इतना ही नहीं हरियाणा के सीएम को उनके निवास पर बने हैलीपैड से उतार कर हैलीकाप्टर को पिंजौर लाकर खड़ा करना इसलिए मजबूरी है कि चंडीगढ़ में जगह नहीं है। प्रदेश में इस प्रकार के तीन केन्द्र पिंजौर, करनाल और हिसार में से केवल करनाल केन्द्र की कार्यप्रणाली ठीक प्रकार से चल रही है जबकि पिंजौर बिमार यूनिट साबित हो रहा है।

चार साल पहले यहां छोटे एयरक्राफ्ट उड़ाने की ट्रेनिंग देने की शुरुआत की गई।