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राजनीति का शिकार कजियाणा पर्यटन केंद्र

7 वर्ष पहले
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पिंजौरब्लॉक के गांव रायतन क्षेत्र के पहाड़ी क्षेत्र स्थित गांव कजियाणा में विगत 17 वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर किया गया पर्यटन केन्द्र राजनीति की भेंट चढ़ चुका है। अपने क्षेत्र में विकास का बाट जोह रहे क्षेत्र वासी अब उसका खामियाजा भुगत रहे हैं। क्योंकि उक्त केन्द्र के निर्माण को प्रदेश सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 1996 फरवरी महीने में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल ने बेहद पिछड़े हुए पिंजौर रायतन क्षेत्र में मोरनी पर्यटन केन्द्र की तर्ज पर विकास की दृष्टि से गांव धतोगढ़ा से कुछ आगे उक्त पर्यटन केन्द्र की आधार शीला रखी थी। लेकिन 1996 के आम चुनावों में सरकार बदली और हविपा-भाजपा गठबंधन की बंसीलाल सरकार ने उक्त केन्द्र के निर्माण कार्य को आंरभ ही नहीं होने दिया गया। जबकि कजियाणा गांव से संबधित पंचायत ने उक्त केन्द्र के लिए कई एकड़ जमीन भी दे दी थी और सरकार ने निर्माण कार्य की राशि भी जारी कर दी थी इसके लिए टेंडर भी हो चुके थे। जबकि उक्त केन्द्र का स्थापति करने की लोगों की लगातार मांग रही जिसे अनसुना किया जाता रहा। उसके बाद 1999 के आम चुनावों में इनेलो-भाजपा की सरकार बनी लेकिन फिर भी उक्त केन्द्र के निर्माण को कोई तवज्जो नहीं दी गई। उसके बाद वर्ष 2004 में पुन: कांग्रेस की सरकार बनी लोगों को उम्मीद बंधी कि शायद इस बार तो उक्त केन्द्र की नर्माण अवश्य हो जाएगा। कांग्रेस सरकार तो बनी लेकिन भजन लाल मुख्यमन्त्री बन सके और फिर से उक्त पर्यटन केन्द्र का निर्माण अब तक नहीं किया गया है जबकि इस विषय में पर्यटन अधिकारियों और मन्त्री तक को उक्त गांव में पर्यटन निगम की भूमि पड़ी होने की पूरी जानकारी है और समय-समय पर पत्रकारों ने भी कई बार संबधित अधिकारियों और मन्त्रियों तक से उक्त केन्द्र के निर्माण के विषय में प्रश्न भी किया जाता रहा है लेकिन केवल आश्वासन के कुछ नहीं हुआ। अब उक्त भूमि पर 15 वर्ष पूर्व रखी गई आधारशीला तक नहीं बची है केवल इतना ही नहीं उसकी ईंटे तक वहां से साफ हो चुकि है। जबकि कजिया गांव के चारों ओर ऊंंची-ऊंची पहाड़ियां और बरसाती नदियां आदि इसकी सुंदरता बढ़ाते हुए किसी हिल स्टेशन का आभास देते हुए नजर आते हैं। केन्द्र को पिंजौर के प्रसिद्ध यादविन्द्रा गार्डन से जोड़ा जाना था और उस समय यहां पर एक रोपवे तक लगाने की योजना पर विचार भी किय