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- \"पिंजौर की अवैध कॉलोनियों को नियमित कराए मौजूदा सरकार\'
\"पिंजौर की अवैध कॉलोनियों को नियमित कराए मौजूदा सरकार\'
1996सेपहले पिंजौर क्षेत्र का दर्जा कस्बे का था। उस समय पंचायती राज के चलते ही सारे काम होते थे। पुराना पिंजौर काफी सिकुड़ा हुआ था। इसी दौरान एचएमटी फैक्टरी से कर्मचारियों की रिटायरमेंट का सिलसिला भी शुरू हो गया, जिससे लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की पूंजी पिंजौर में ही लगाकर अपने आशियाने बनाने शुरू कर दिए। उधर, बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में हजारों उद्योग स्थापित होने के कारण उनमें काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारियों ने भी पिंजौर क्षेत्र में रहने के लिए अपने घर बनाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते पुराने पिंजौर के आसपास दर्जनों से सैंकड़ों और सैंकड़ों से हजारों मकान बनने लगे। धीरे-धीरे आसपास छोटी-छोटी काॅलोनियां बननी शुरू हो गईं। इन बढ़ती काॅलोनियों को देख इन्हें अवैध काॅलोनियां करार देते हुए जिला नगर योजनाकार विभाग द्वारा इन्हें गिराने का काम शुरू कर दिया गया। सैंकड़ों मकानों पर पेरीफेरी की तलवार लटकने लगी। लोगों द्वारा अपनी सारी पूंजी लगाकर बनाए गए आशियानों पर गिराए जाने का खतरा मंडराने लगा। पीड़ित लोगों ने पिछले करीब 10 वर्षों से लगातार प्रदेश की हर सरकार को इन काॅलोनियों को नियमित करने की मांग उठाई हुई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा प्रदेश में सैकड़ों अवैध काॅलोनियों को नियमित करने की घोषणा से पिंजौर क्षेत्र के सैंकड़ों परिवारों में एक उम्मीद जगी थी, परन्तु इस दौरान प्रदेश में सैंकड़ों काॅलोनियों को नियमित कर दिया गया, परंतु जिला पंचकूला की एक भी काॅलोनी को नियमित नहीं किया गया। लोगों की क्षेत्र में दर्जनों अवैध काॅलोनियों को नियमित करने की मांग ने भी जोर पकड़ लिया।
गौरतलब है कि पिंजौर माॅडल टाउन से नालागढ़ रोड की ओर गांव लोहगढ़, वासुदेवपुरा, धमाला आसपास और बीसी डब्ल्यू सुरजपूर, महादेव काॅलोनी, रज्जीपुर, रामपुर सियुड़ी लेबर काॅलोनी, चंडीमंदिर गेट नंबर-1, घाटीवाला आसपास के क्षेत्र में काफी समय से काॅलोनियों में सैंकड़ों मकान बने हुए हैं, जहां के लोग अपनी काॅलोनियों को नियमित करने की मांग उठाते रहे हैं।
1996 से पहले पिंजौर में पचांयती राज था, जिसमें मैंने सरपंच बनकर भी काम किया है। उसके बाद जैसे ही पिंजौर को नगर पालिका का दर्जा मिला, पिंजौर देखते ही देखते फैलना शुरू हो गया। आसपास के कई गांव कब पिंजौर में मिल गए, पता ही नहीं लगा। आबादी बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र भ