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बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए जमीन भी बेचनी पड़े तो बेच दूंगा

6 वर्ष पहले
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रवीश कुमार झा/संदीप कौशिक|पंचकूला

पंचकूलावैसे तो पढ़े-लिखे लोगों का शहर हैं, लेकिन यहां से करीब 20 किलोमीटर दूर रायपुररानी का कनौली गांव जहां के बाशिंदे अपने घर की बेटियों को पढ़ाई के खातिर अपने इलाके से दूर नहीं भेजना चाहते। कारण सालों से चलती रही रीति रिवाज जिसके तहत बेटियों की पढ़ाई आसपास के स्कूल या फिर कॉलेज में करवाई जाए और शादी की उम्र होते ही उसकी शादी कर दिए जाए। गांव में करीब 200 वोटें हैं यानी वहां की जनसंख्या 800 के करीब है। उसी गांव का सविंदर सिंह ने अपनी बेटी को सिर्फ पढ़ाने की ठानी है, बल्कि अपनी बेटी के ख्वाब को सच करने में अगर उसे अपनी पूरी जमीन भी बेचनी पड़े तो वह इसके लिए तैयार है। सविंदर की 18 वर्षिय बेटी सीवानी चाइना के गोयांग यूनिवर्सिटी से एमबबीएस का कोर्स कर रही है। सविंदर पेशे से स्कूल टीचर हैं और उनकी प|ि वीना रानी नर्स हैं। सीवानी का छोटा भाई साहिल राघव 14 साल का है जो कि दसवीं कक्षा मंे पढ़ता है।

प्रधानमंत्रीकी शुरुआत काबिले तारीफ लेकिन अभी भी लोग पुराने सोच के: वीनारानी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान तो शुरू किया गया जिसके तहत उन्होंने बेटी पढ़ाने के लिए कई तरह के प्रोजेक्ट भी शामिल किए हैं। लेकिन अभी भी लोगों की सोच पुराने ढ़र्र्े पर ही काबिज है। वीना ने बताया कि हमें अपनी सोच को बदलना चाहिए और बेटी को आगे को उनकी ख्वाबों को पूरा करने के लिए उन्हें बेटों के बराबर सुविधाएं देनी चाहिए जो उनके बस में हो। बेटियां पराई नहीं होती, बल्कि अपनी ही होती है। उन्हें बेटों की तरह तालीम दें, बेटों की तरह आगे बढ़ाएं। बेटियां आगे बढें़गी तो ही देश तरक्की करेगा।

शिवानी

सविंदर ने बताया कि मैं अपने बेटे और बेटी मैं अंतर नहीं करता। मैं अपनी बेटी शिवानी को बेटे की तरह ही हरेक सुविधा देना चाहता हूं। उसके डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए अगर पूरी जमीन भी बेचनी पड़े तो वह बेच देगा। उसने बताया कि अाज के जमाने में बेटी और बेटे में कोई अंतर नहीं है। बेटे की तरह बेटियां भी सभी कामों को अच्छी तरह कर सकती हैं। नाम रोशन कर सकती हैं। बेटियां बेटो से कम नहीं होती, बस समझने का फर्क है। मैं अपने पापा के सपनों को पूरा करके दिखाऊंगी।

शिवानी के पिता सविंदर और मां वीना।

शिवानी की मां वीना रानी ने बताया कि बेटी को पढ़ाई के लिए बाहर भेजे जाने का सगे संबंधियों ने काफी विरोध किया। यहां तक कि उन्होंने लोकल किसी नर्सिंग इंस्टिट्यूट में दाखिला दिलाकर कोर्स कराए जाने की बात बताई। रानी ने बताया कि सवाल मेरी बेटी के करिअर का था इसलिए मैने और मेरे पति ने किसी की एक सुनी और अपने बेटी का एडमिशन चीन के मेडिकल कॉलेज में करवाया।