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ओवरलोड चल रही हैं बसें और ऑटो, हो सकता है हादसा
पंचकूलाकेपार्कों में शहर के लोग जब सैर के लिए निकलते हैं तो साथ ही शहर की समस्याएं भी निकलकर उनके सामने आने लगती हैं। सभी लोग अपने-अपने विचार देने लगते हैं, अपनी-अपनी समस्या सुनाते हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उस बात पर होती है, जो बात सब लोगों की समस्या की होती है। शुक्रवार सुबह सेक्टर-5 के पार्क में बात चल रही थी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की, जिस पर लोगों ने कई सवाल उठाए। लोगों में चर्चा चल रही थी ऑटो रिक्शा और बसों के ओवरलोड चलने की। उनकी बात भी ठीक थी। हर बस और ऑटो कैपेस्टी से दोगुनी सवारियों को लेकर चलते हैं। ऐसे में कोई भी दुर्घटना हो सकती है।
आरके गोयल बोल रहे थे- हम तो पिछले कई सालों से यही देखते रहे हैं। यहां तो भई ऐसे ही लोगों को जानवरों की तरह बसों, ऑटो में ठंूस-ठंूस कर भरा जाता है। प्राइवेट वाहन चलते हैं तो क्रूज गाड़ियों, मैक्सी कैब्स को इसी तरह ट्रांसपोर्ट के लिए यूज किया जाता है, पर ट्रैिफक पुलिस को इसकी कोई परवाह नहीं होती। उनकी बात को काटते हुए जय भगवान बोले- माजरी चौक पर कभी जाकर देखिए, वहां तो बरवाला-रायपुररानी जाने के लिए वाहनों की भीड़ लगी रहती है। उससे ज्यादा भीड़ लोगों की होती है। अरे भाई साहब, वहां की बात छोड़ो, आप बस स्टैंड पर आकर ही देख लीजिए। नारायणगढ़ और रायपुररानी की तरफ जाने वाली बसों के बाहर लोग लटके होते हैं। बसें एक तरफ ऐसे झुकी होती हैं, जैसे अभी पलट जाएंगी। पुलिस और प्रशासन भी इस बारे में कुछ नहीं करता। इतनी बात सुनते ही सबने अपनी-अपनी राय देनी शुरू कर दी। किसी ने इसका जिम्मेदार प्रशासन को बताया तो किसी ने इसके लिए रोडवेज की गलती बताई। आखिर में सभी लोगों ने निर्णय यह लिया कि लोकल ट्रांसपोर्ट के लिए बसें बढ़ाई जानी चाहिए। अगर ऐसा किया गया तो लोगों को इसी तरह रोजाना खतरों से जूझते हुए ऑटो और बसों में सफर करना पड़ेगा।
शहर में चलने वाले ऑटो और बसों में लोग लटके रहते हैं। वाहन इतने ज्यादा ओवरलोड होकर चलते हैं कि कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन इस तरफ तो ट्रैिफक पुिलस ध्यान देती है और ही प्रशासन। यह बात शनिवार सुबह सेक्टर-5 के टाउन पार्क में सैर कर रहे लोगों ने कही।