शहर में गवर्नमेंट कॉलेज का इंतजार
शहरमेंलोगों को अपने बच्चों के एडमीशन की हमेंशा िचंता होती है। उसके साथ ही यह चिंता होती है की अगर बच्चें को अच्छी शिक्षा लेनी है तो उसको दूसरे शहर जाना पडेगा। शहर में कोई सरकारी कॉलेज नहीं है। उन लोगों को सबसे ज्यादा िचंता होती है। जो प्राईवेट कॉलेज या इंस्टीट्यूट में अपने बच्चे पढ़ा नहीं सकते हैं। जिनकी फीस एक सरकारी कॉलेज से कहीं ज्यादा होती है। उसके साथ अभी यह हालात हैं कि बच्चों को बाहर पढ़ने के िलए जाना पड़ रहा है। सरकारी कॉलेज हो जाए तो बच्चों को बाहर पढ़ने के िलए जाना पड़े।
पंचकूला , पंचकूला चंडीगढ़ जीरकपुर के साथ लगते अन्य शहरों कि तरफ बच्चो को रुख करना पड़ रहा है। हर जगह पढ़ाई का एक स्तर नहीं है। चंडीगढ़ में माना जाता है कि अगर बच्चा वहां पढेगा तो अच्छा भविष्य बनेगा। यही सुविधा सरकार शहर की बच्चों को यहां अपने शहर में दे तो उनको इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं पडती है। घर का पैसा घर में ही रह जाएगा कहने का अर्थ है कि शहर का पैसा शहर में रहेगा। ऐसे में यहां पर लोगों को दिक्कतें भी आती हैं। जैसे की कनवेंस की दिक्कत जेब पर अतिरिक्त बोझ पडना। माता पिता को तब तक चिंता रहती है जब तक उनका बच्चा घर भी सही सलामत नहीं पहुच जाता है। इन सब प्रकार की चिंता से भी लोगों को मुक्ति मिल जाएगी।
बस शहर में एक सरकारी कॉलेज खुलने की देर है। इसी वजह से लोगों को उमीद है िक सरकार उनकी बात सुनेगी और यहां पर एक अच्छा हायर एजूकेशन के िलए सरकारी कॉलेज खोलेगी।
^जब शहर में सरकार अपना कॉलेज खोल देगी तो उससे पढ़ाई करने में बच्चों को मदद मिलेगी। बच्चों की मदद तो सरकार करेगी ही वहीं पर प्रांत का नाम रौशन करने में शहर के बच्चों का भी बड़ा योगदान रहेगा। हमारे शहर में बहुत ज्यादा टैलेंट है। िजसको दसूरे शहर के लोग ले जाते हैं। बच्चा यहां का होता है और बस केवल पढ़ाई दूसरे शहर में होता है तो उसका नाम दूसरे शहर से जुड़ जाता है। यहां के खिलाड़ी खेलते दूसरे शहर के िलए है तो वो वहां के ही रह जाते हैं। जब यहां का खिलाड़ी अपने शहर प्रांत के लिए खेलेगा तो जो भी पदक वो जीतेगा वो प्रांत को प्राप्त होगा। इससे खिलाड़ी का मनोबल भी बढ़ेगा। -संजय
^बच्चों को जब भी हायर एजुकेशन के िलए बाहर जाना पडता है तो वहां पर उनको कई बार उस विषय में एडमीशन नहीं मिलती है। जिसमें वो एडमीशन नहीं लेना चाहते हैं। ऐसे में उनको मायूस होकर