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पावरकॉम की कार्यप्रणाली से हजारों उपभोक्ता परेशान
जीरकपुरशहरके लोगों को ऐसे तो कई परेशानियों का सामना पड़ रहा है। लेकिन यहां सबसे ज्यादा परेशानी रही तो वो है पावरकॉम की कार्यप्रणाली से। यहां लोगों को समय पर बिजली के बिल नहीं मिलते और मिलते भी हैं तो एवरेज से ज्यादा। जिस कारण लोगों को ये दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। इसके बावजूद पावरकॉम अपनी गलती नहीं मान रहा है। गत दिनों ही बलटाना के श्रवण कुमार का दो महीने का बिजली करीब 50 हजार रुपए पावरकॉम की ओर भेजा गया। इसके अलावा यहां पावरकॉम के कर्मचारी मीटरों की रीडिंग करने भी नहीं आते हैं। बुधवार को जीरकपुर में पावरकॉम की एक टीम बलटाना में चेकिंग करने पहुंची। उनके साथ एक्सईएन एमपी सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि लोग ज्यादा बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि बिजली का लोड कम सेंग्शन कराया हुआ है। इसी वजह से बिल ज्यादा रहे हैं। इसकी चेकिंग की जा रही है कि कौन कितनी बिजली का इस्तेमाल कर रहा है और कागजों में उसने पावरकॉम से कितनी िबजली खर्च करने की मंजूरी ली हैं। जबकि सच यह है कि जीरकपुर में बिजली बिलाें को जनरेट करने में भारी गड़बड़ी हो रही है। िबल की राशि पर नजर पड़ते ही लोगों को करंट लग रहा है। जितनी बिजली का इस्तेमाल नहीं किया गया उसके कई गुणा ज्यादा िबल लोगों को मिल रहे हैं। ऐसे एक नहीं सैकड़ों की संख्या में उपभोक्ता िशकायत कर रहे हैं।
एमपी सिंह, एक्सईएन
जब कोई नया उपभोक्ता मीटर के लिए आवेदन करता है तो उसको मीटर लगने से पहले पावरकॉम के किसी जेई स्तर के कर्मचारी को मौके पर जाकर चेक करना होता है कि जिस जगह मीटर लगने वाला है वहां बिजली के कितने स्वीच और प्लग लगे हैं। ऐसा नहीं चेक नहीं किया जाता।
जीरकपुर में िबजली के कनेक्शन और लाेड सेंग्शन करने में दलालों की चलती है। पावरकॉम के बाहर दलालों के पक्के अड्डे हैं। यह पाॅवरकाम के अधिकारियों को भी पता है। इसके बावजूद उन दलालों को वहां से हटाने के बजाए अब लोगों के लोड को लेकर अंगुली उठाई जा रही है। किसी की हर्जाना किसी को भरना पड़ रहा है। दलालों के साथ बिना सेटिंग के यह काम नहीें हो सकता है।
शहर में बिजली बिलों को जनरेट करने का पुराना तरीका खत्म कर अब नया तरीका इस्तेमाल किया गया है। ऑन स्पाॅट बिल जनरेट करने के लिए जिन बिलिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया है। वे तकनीकी तौर पर यहां कारगर साबित नहीं हो रही है। जो डाटा इन मशीनों को उपलब