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दो एंबुलेंस से ही शहर का गुजारा, नहीं तो मरीजों को होगी दिक्कत

7 वर्ष पहले
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शहरमेंएक एंबुलेंस से अब पूरा काम नहीं हो सकता है। यहां पर कभी समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। यहं बात शहर के निवासी अजीत सिंह कह रहे हैं। जिनको दो दिन पहले ही एंबुलेंस की जरूरत पडी थी। शुक्रवार को उनकी माता की हालत खराब हो गई तो उन्हेांने एंबुलेंस को फोन मिलाया तो एंबुलेंस पीजीआई थी।

जब वहां से आधे घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई तो उनको प्राइवेट वाहन करना पड़ा और वो अपनी माता को प्राइवेट अस्पताल भेज दिया। जिसके बाद उनको अपनी माता को दिल्ली ले जाना पड़ा, क्योंकि उनकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी। सही समय पर इलाज मिलने पर उनको दिल्ली जाना पड़ा। अब अगर शहर में दो एंबुलेंस होती तो उनको इतनी ज्यादा दिक्कत नहीं होती और उनकी माता का सही समय पर प्राथमिक इलाज मिल जाता।

यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जहां पर एंबुलेंस दूसरे मरीज को ले जाने या अस्पताल से लाने में देर से पहुंची है। इससे पीछे शहर मे जाम लगना भी एक कारण है। जिसका हर्जाना आम इंसान को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए लोग बार बार मांग कर हरे हैं कि यहां पर हेल्थ डिपार्टमेंट कम से कम दो एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था करे।

शहर की करीब दो लाख की अाबादी है। अब इसको सब डिवीजन भी घोषित कर दिया गया है। हमेशा ही यहां पर एक्सीडेंट का खतरा रहता है। उसके बाद सड़क पर हमेशा ही रश रहता है। इतने बडे जनसंख्या वाला शहर है। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने यहां पर केवल एक ही एम्बुलेंस की व्यवस्था की है, जो की दो लाख की अाबादी के लिए प्रयाप्त नहीं है। यहां पर कम से कम दो एंबुलेंस होनी चािहए, ताकी एक कहीं पर गई हो तो दूसरी से मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाए।