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- \"घर के बगीचे में भी उगा सकते हैं यूरिया के िबना सब्जियां\'
\"घर के बगीचे में भी उगा सकते हैं यूरिया के िबना सब्जियां\'
आजजो भी सब्जियां,फल और अनाज हम खा रहे हैं उसमें यूरिया है। जो शरीर को खराब करता है। मिट्टी के लिए भी नुकसान देह है। इससे बचने के लिए एक एनजोओ ने जैविक खाद का आविश्कार किया है। यह खाद किसी भी पैदावार को बढ़ाएगी। साथ ही इसमें ऐसे तत्व नहीं होंगे जो शरीर के लिए हानिकारक है। एफएआईटीएच यानि (फूड अालवेज इन होम) नाम के इस एनजीओ को रांची से यहां जीरकपुर बुलाया गया।
फेथ बागवानी के नाम से काम कर रहे इस एनजीओ को जीरकपुर लाने के बारे में विधायक मुख्य संसदीय सचिव एनके शर्मा ने बताया आज जब लोगों को स्वास्थ्य रहने के लिए बिना यूरिया के फल, सब्जियां और अनाज की जरुरत है। इसी कारण इस एनजीओ ने जो जैविक खाद्य बनाने का फामूर्ला बनाया है। उसकी जानकारी देने के लिए अधिक से अधिक लोगों को यहां बुलाया गया है। िकसानों को भी इसकी जानकारी दी जा रही हैै। अगर यहां की जमीन पर यह खाद्य काम कर गई तो यह भविष्य में एक शानदार कदम होगा।
इस एनजीओ की सदस्य पूनम सिंह ने बताया िक जैविक खाद्य के लिए नीम की पत्तियां का इस्तेमाल किया जाता है। नीम की पत्तियां कीड़ों को उपज से बचाती है। इसके अलावा इसमें धान के बीज की खाल जिसे भू्सा कहते है उसका इस्तेमाल होता है। भूसा मिट्टी में मिलाते हैं तो उसमें हवा के लिए जगह होती है। कुछ उपजों में गुड का इस्तेमाल होताहै। जीरकपुर में पटियाला रोड पर एक वर्कशॉप की तहर यहां किसानों में समझाया गया। इसमें एनके यादविंदर शर्मा, हरजिंदर सिंह अन्य कई लोगों ने हिस्सा िलया।