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के एरिया ट्रैफिक लाइटस पर रात 9.30 बजे तक तैनात रहे पुलिस

7 वर्ष पहले
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के-एरियाबलटानाचौराहे से जीरकपुर, बलटाना, ढकोली के ट्रैफिक के अलावा जीरकपुर-कालका नेशनल हाईवे का भी ट्रैफिक गुजारता है। पूरे पांच राज्यों का ट्रैफिक गुजरता है। यहां कई हादसे हो चुके हैं। एक बुजुर्ग की भी मौत भी हो चुकी है। इसके साथ ही एक महिला युवक ट्रक के नीचे आकर अपनी जान गवां चुके हैं। ट्रैफिक लाइट़्स जलने के कारण यहां पर अक्सर एक्सीडेंट तो होते ही है। यहां सबसे ज्यादा खतरा स्कूली बच्चों को बना हुआ है। के एरिया के सामने सेंट्रल स्कूल है। इसके साथ कई और भी स्कूल हैं जिनके बच्चे यहां से गुजरते हैं। दिन में दो बजे के समय यहां बच्चों को जान जोखिम में डालकर सडक़ पार जाना पड़ता है। यही नहीं यहां पर रात को कम से कम 9.30 बजे तक ट्रैफिक पुलिस तैनात रहे। अभी दो दिन पहल ही एक महिला की ट्रक से टक्कर होने पर मौके पर ही मौत हो गई। ऐसे में अगर वहां पर ट्रैफिक कर्मी भी तैनात होते तो शायद ये हादा नहीं होता है। इस चौराहे की बंद ट्रैफिक लाइट्स को रोजाना पुलिस देखती है। बावजूद यहां इसे ठीक नहीं करती है। पुलिस वाले कभी चालान करने तो कभी किसी अन्य काम में चौराहे से इधर-उधर हो गए तो ट्रैफिक यहां फंस जाता है।

^यहां ट्रैफिक भी पुलिस भी ट्रैफिक कंट्रोल नहीं कर पा रही है। कई बार पुलिस ही नहीं होती है। बिना पुलिस, बिना ट्रैफिक लाइट्स के यहां लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। रजिंदररावत

^इस चौराहे से गुजरना होता है तो मुश्किल रहती है। चारों ओर से गाड़ियां आमने सामने लगी होती है। यहां टाइमर के साथ ट्रैफिक लाइट्स जलनी चाहिए। -नीरज