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रिओ-डी-जनारियो ओलंपिक-16 में गोल्ड लाने का लक्ष्य
गुलजाररेसलिंगअखाड़ेे में इस समय सात ऐसे पहलवान हैं। िजनकी तैयारी यहां के कोच 2016 ब्राजील देश की राजधानी रिओ-डी-जनारियो में होने वाली ओलंपिक के लिए करवा रहे हैं। उसके लिए इन्होंने अभी यूपी के गोंडा जिले में हुई नेशनल गेम को ड्रॉप कर दिया है। क्येांकि यहां पर जो क्वालिफाई करता वो आगे ओलंपिक क्वालिफाई टूर्नामेंट में भाग लेना पड़ता। वहां से खाली हाथ ये खिलाड़ी आए इसलिए कुंड्डू चाहते थे कि वो खुद इनको एक साल तक ट्रेंड करें। इससे ये अगले साल पहले नेशनल में गोल्ड लाएं फिर ओलंपिक क्वालिफाई के लिए मैच खेंले। वहां पर जीतने के बाद ओलंपिक में जांए तो खाली हाथ जाएं। वहां से गोल्ड ही लेकर ही आंए। इसके लिए एक साल लगातार ट्रेनिंग जरूरी। 7 खिलाड़ियों से बात कि तो उन्होंने भी यही कहा कि वो 2016 में होने वाली ओलंपिक में गोल्ड लाना चाहते हैं। वहीं पर उनके फििजयोथेरेपिस्ट का भी कहना है कि एक साल के अंदर ये खिलाड़ी ओलंपिक में गोल्ड लाने के लिए पूरी तरह फिट हो जाएंगे। सातों पहले भी इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड ला चुके हैं। और कुछ नेशनल में मेडल ला चुके हैं। देखते हैं कि कोच और पहनवानों को नवंबर 2015 में हुए नेशनल गेम ड्रॉप करने का फैसला कितना सही साबित होता है।
सात में से पांच िखलाड़ी जीरकपुर के
यहांपर सातों खिलाडि़यों में से पांच जीरकपुर में से हैं। बाकी के दो मोहाली चंड़ीगढ़ से यहां पर प्रैक्टिस के लिए आते हैं। संतोष मुल्ता गोरखपुर यूपी के हैं पर यहां पर हॉस्टल में ही रह रहे हैं। अदित्या, प्रभपाल , सुनील महिपत पांचों जीरकपुर से हैं। गुरप्रीत मोहाली साही माजरा से और परदीप चंडीगढ़ से यहां पर रैसलिंग सीखने के लिए आते हैं।
रोज पांच घंटे की ट्रेनिंग ले रहे हैं
खिलाडि़योंने बताया कि वो रोज यहां पर पांच घंटे ट्रेनिंग करते हैं। पांच घंटों में से एक घंटा वो दौड़ने में बिताते हैं। वहीं पर चार घंटे वो प्रैक्टिस करते हैं। फिजिओथैरेपिस्ट डॉ तरुण भुक्कल ने बताया कि वो खिलाडि़यों पर विशेष ध्यान दिए हुए हैं। उसके बाद वो रिलैक्सिंग , जॉगिंग और एक्सरसाइज कर रहे हैं।
इस बार एशियन में प्रदर्शन अच्छा नहीं था
कोचआरएस कुंड्ड़ ने बताया िक वो इस बार भारत की ओर से एशियन गेम्स में प्रदर्शन किया गया है। अगले साल जाएंगे तो एक साल और यहां पर ट्रैनिंग करके जाएंगे। यहां ट्रैनिंग दे रहे हैं। वहां पर कोच दूसरे हांे