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सफारी में शेरों के दर्शन से महरूम हुए पर्यटक

7 वर्ष पहले
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छतबीड़चिडिय़ाघरकी लॉयन सफारी बीते तीन दिन से दर्शकों के लिए अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है। इससे जू में दूरदराज से आने वाले हजारों पर्यटक मायूस लौटने को मजबूर हैं। हालांकि सफारी बंद करने पीछे वहां जंगल की साफ सफाई मेंटीनेंस को कारण बताया गया है परंतु असली वजह कुछ और है। दरअसल, जू प्रबंधकों के पास फिलहाल सफारी में डिस्पले के लिए कोई शेर उपलब्ध नहीं है।

जू में पर्यटकों की संख्या में बीते कुछ सालों से लगातार इजाफा हो रहा है। जू आने वाले पर्यटकों में बच्चों समेत परिवार वाले 70 से 80 फीसदी लोग लॉयन सफारी में शेरों को करीब से देखने, उनके स्टिल वीडियो बनाने को ललायित रहते हैं। यही कारण है कि शेर सफारी का सरकारी अनुबंध प्रति माह डेढ़ लाख रुपए होने के बावजूद यहां पर्यटकों की भीड़ जुटी रहती है। वीकेंड्स में पर्यटकों की संख्या तीन से चार गुना बढ़ जाती है। बीती 18 सितंबर से लॉयन सफारी पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है। इस बारे केवल सफारी की टिकट खिड़की पर नोटिस है, जू के प्रवेश गेट पर नहीं। इससे सैंकड़ों पर्यटक रोजाना मायूस लौट रहे हैं। सफारी ठेकेदार संधू के अनुसार सफारी बंद करने के पीछे साफ सफाई को कारण बताया गया है और अगले आदेशों तक सफारी बंद रखी गई है।

असलियत यह है कि जू प्रबंधकों के पास डिस्पले के लिए कोई शेर ही नहीं बचा है। अभय की शनिवार को मौत के बाद लॉयन सफारी में अब चार शावकों समेत केवल छह शेर रह गए हैं। हैली को चार बच्चों के पास मौजूद है, उसे बच्चे छोड़ सफारी में डिस्पले नहीं किया जा सकता। बूढ़ा रॉकी बचा है जिसे पहले सफारी में ऑफ डिस्पले रखा जा रहा है। जू के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन धीरेंद्र कुमार के अनुसार शेरों के डिस्पले को लेकर समस्या जरुर है परंतु इसका जल्द ही हल निकाल लिया जाएगा। कई विकल्पों पर विचार चल रहा है। इसमें बूढ़े रॉकी को सफारी में दोबारा छोड़ने या फिर बच्चों समेत हैली के लिए सफारी में बड़ा एनक्लोजर बनाने के अलावा अन्य चिडिय़ाघरों से शेरों का प्रबंध करना भी शामिल है।