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सावित्री एन्क्लेव में पार्कों की हालत बदहाल, जो झूले लगे हैं वे टूट चुके

7 वर्ष पहले
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वीआईपी रोड पर सावित्री एन्क्लेव पार्कों की मेंटेनेंस नहीं हो रही है।

भास्कर न्यूृज | जीरकपुर

सावित्रीएन्क्लेवके निवासियों की एक चिंता इस समय बनी हुई है कि वहंा के पार्क इस हालत में नहीं है कि वहंा पर सैर करा जाए। वहां पर आराम से बैठकर बात की जाए। वहां पर बाॅउड्री वाल भी ढंग से नहीं हैं। दो पार्क हैं जिनकी हालत तो बत से बत्तर हो गई है। यहां पर प्रशासन इन पार्कस का ध्यान नहीं रख रहा है। शाम को तो दूर दिन में भी यहां पर कोई नही बैठता है। बरसातों में यहां तालाब बन जाता है। जिससे उसकी हालत और भी खराब हो जाती है। पार्क में लैंप भी नहीं लगे हुए हैं। शाम को यहां पर रोशनी रहे। के बराबर यहां पर फेसल्टी दी गई है। लोगों को लगता है कि इससे अच्छी तो लोहगढ़ गांव के पार्क है। ऐसा लगता ही नहीं की वह गांव का पार्क है। जब हमारी सोसायटी का पार्क तो गांव से भी ज्यादा बदहाल है। कहीं से लगता नहीं की शहर में ऐसा पार्क कहीं हेाता है।

पानीकी निकासी के लिए प्रबंध नहीं: सावित्रीएन्क्लेव के निवासी एस के शर्मा का कहना है कि प्रशसन को हम कई बार कह चुके हैं उसके बाद भी यहां पर पानी निकासी के लिए कोई प्रबंध नहीं िकया गया है। वहीं पर जब बरसात होती है तो पानी तीन से चार दिन तक पार्क में ही रहता है। जिससे बिमारी होने का डर बना रहता है। वैसे भी अभी डेंगू मलेिरया के मरीज बहुत हा रहे हैं। ऐसे मे तो हमारी सोसायटी भी सुरक्षित नहीं है।

बाॅउड्री वाल की जाए

सावित्रीएन्क्लेव के निवासी राम िसंह का कहना है कि जब से पार्क बनए गए हैं तब से अब तक इसकी बाॅउड्री वाॅल खराब हो चुकी हैं। वॉल में से धीरे धीरे इंट टूटती चली गई ओर अब यहां पर बाॅउड्री वॉल केवल नाम की ही रहे गई है। इससे सभी परेशान हैं। इससे अवारा पशू के अंदर जाने का डर है। वैसे भी शहर में डॉग बाइट के केस बहुत ज्यादा हो गए हैं। बॉउडी वॉल होने से आवारा कुत्तेां से बचाव रहेगा।

स्ट्रीट लाइट या लैंप हो

स्ट्रीटलाइट या लैंप होना एक पारक के लिए जरूरी है। यह बात देवदत कह रहे हैं। उनका कहना है कि एन्लेव में बने पार्को में कहीं भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। जो रोड के साथ हैं वहां पर भी यही हाल है क्योंकी रोड के उपर लगी स्ट्रीट भी नहीं जल रही हैं। इसलिए पार्क के बीच में एक लैंप जरूर होना चाहिए ताकी शाम को सैर करते वक्त किसी प्रकार का डर हो, रोशनी रहे।

सावि