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गुलजार अखाड़े के पहलवानों ने देश को दिए 33 मेडल्स

7 वर्ष पहले
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{अनिलकुमार ने 96 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता 2010 में। इससे पहले भी अनिल कुमार ने ग्रैंड प्रिक्स इंटरनेशनल कंपीटिशन 2005 में गोल्ड मेडल हािसल किए थे। इस समय उन्होंने बाउट 97 केजी वर्ग में खेली थी।



कॉमनवेल्थ यूथ रेसलिंग चंैपिंयनशिप

{संतोषकुमार यादव 50 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था 2010 में।

{प्रदीप कुमार का 76 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल आया था 2010 में



काॅमनवेल्थ सीनियर रेसलिंग चैंपिंयनशिप

{अनिलकुमार ने 96 िकलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता 2011 में।



काॅमनवेल्थ जूनियर रेसलिंग चैंपिंयनशिप

{संतोषकुमार यादव ने 50 िकलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता 2012 में।



एशियनजूनियर सब जूनियर रेसलिंग चैंपिंयनशिप

{महिपतका 54 किलो वर्ग में गोल्ड मैडल आया था। वर्ष है 2010

जब से अखाड़ा जीरकपुर में शिफ्ट हुआ है, तबसे इंटरनेशनल लेवल पर 10 मेडल आएं हैं। इसमें छह गोल्ड मेडल हैं। वहीं पर नेशनल लेवल में 34 मेडल्स पहलवान हासिल कर चुके हैं, जिसमें 14 गोल्ड हैं।

किसने जीता रेसलिंग में गोल्ड मेडल

जीरकपुर में क्यों स्थापित करना पड़ा अखाड़ा

कैसे पड़ा गुलजार अखाड़े का नाम

4अप्रैल 2005 में पद्मश्री करतार सिंह अखाड़ा के फाउंडर प्रेसिडेंट गुलजार िसंह का अचानक ही दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 13 अप्रैल 2005 काे ही फाउंडर गुलजार सिंह को समर्पित करते हुए अखाड़े की मैनेजमेंट कमेटी ने सर्वसहमति से इसका नाम बदलकर गुलजार रेसलिंग अखाड़ा रख दिया गया। ताकि गुलजार पहलवान फाउंडर प्रेसिडेंट को ऐसे जीवित रखा जा सके।

गुलजार सिंह की अचानक मौत के बाद स्टूडियों के मालिक अमरीक िसंह रंधावा ने एक साल के अंदर अखाड़ा बदलने का नोटिस पहलवानों को दे दिया। आपको बता दें कि अमरीक सिंह दारा सिंह के सबसे छोटे बेटे हैं। उसके बाद 2006 में गुलजार रेसलिंग अखाड़ा दारा स्टूडियों से बदलकर एकेएस कॉलोनी जीरकपुर में स्थापित हो गया। लेकिन अभी भी यहां के कोच आरएस कुंड्ड़ु ही थे। यहां पर 2006 से ही सफलता पूर्वक अखाड़ा चलाया जा रहा है। यहां आपको बता दें की कोच आर एस कुंड्ड़ु ने बीए,बीपीएड, एनआईएस करने के बाद कोचिंग देनी शुरु की है। यह मुलता शाहपुर गांव, डिस्ट्रिक्ट पानीपत हरियाणा के रहने वाले हैं। इन्हें 2012 में द्रोंणाचार्य अवाॅर्ड से भी नवाजा गया है।

भूपेश िसंह |जीरकपुर

जीरकपुरका गुलजार अखाड़ा शहर क