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बच्चों को सही राह दिखाएं पेरेंट्स

6 वर्ष पहले
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सड़कहादसांेके लिए कौन जिम्मेदार हैω जब कोई हादसा हो जाता है तब सभी बातें करते हैं पर सही मायने में हम सड़क पर चलते समय खुद अपने बच्चों को यह नहीं बताते हैं कि ट्रैफिक नियमों को मानना चाहिए। सीट बेल्ट पहननी चाहिए।

तेज रफ्तार से गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। 18 साल से कम उम्र के बच्चांे को ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए। लेिकन इसके विपरीत पेंरेट्स बच्चों को गाडियां थमा देते हैं। अपने थोड़ से स्वास्र्थ्य के लिए कि दुकान का यह काम बच्चो गाड़ी ले जाकर कर देंगे तो काम हमें नहीं करना पड़ेगा।

ट्यूशन छोड़ने जाने के बजाय उन्हें स्कूटर, मोटरसाइकिल देकर अपनी पल्ला झाड़ना। यह हो रहा है। ऐसे में बच्चों को यह समझ नहीं रहा कि उनको जब मां बाप गाड़ी चलाने के लिए कह रहे हैं तो 18 साल से कम उम्र को गाड़ी चलाने पर क्यों पाबंदी है। सड़क सुरक्षा नियमों को बच्चे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसी का नजीता ताजा है जीरकपुर में फ्लाईओवर पर पलटी कार। यहां मनकीरत के पेंरेट़्स ने उसे गाड़ी दी। उसने तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई। खुद की जान तो गई। सड़क पर चलने वाले अन्य लोगाें को भी परेशानी में डाला। ऐसा नहीं होना चाहिए। पेरेंट़्स अपने स्तर पर तय कर सकते हैं कि बच्चा सड़क पर चले तो उसका व्यवहार और के प्रति भी जिम्मेदारी वाला होना चाहिए। जब तक बच्चे बालिग हो उसको गाड़ी नहीं देनी चाहिए। अगर पेरेंट्स ध्यान नहीं देंगे तो बच्चे लापरवाही करने से पीछे नहीं हटेंगे।

^कई बच्चे इतने छोटे है कि उनको गाड़ी की पूरी समझ भी नहीं होती है। इसके बाद भी पेरेंट़्स बच्चों को दो पहिया वाहन चलाने को देते है। उन पेरेंट्स को सोचना चाहिए कि अपने नासमझ बच्चे को गाड़ी की चाबी देकर उसकी िंजंदगी से खिलवाड़ करने के साथ सड़क पर चल रहे और लोगांे की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। सुनीता

^पेरेंट्सके लिए यह बडृी जिम्मेदारी है कि बच्चों को सड़क पर चलने के नियम बताए। खुद भी उनका पालन करें। ऐसा करने पर हम एक ऐसी शुरुआत करेंगे जो आगे चलकर हम सबके लिए फायदेमंद साबित होगी। सड़क पर चलते समय अगर हम सभी नियमों की पालना करेंगे तो कई हादसे होने से बच जाएंगे। कई जिंदगियां बच जाएंगी। रागिनी

^हर स्कूल में ट्रैफिक अवेयरनेस के जरीए बच्चांे को समझाया जाता है। लेकिन अगर सड़क पर बच्चा टीचर को नजर गया तो वहां उसे टोकेंगे नहीं। बच्चों को ट्रैफिक अवेयरनेस के बारे में जागरूक करने के साथ उनको पूरी तरह से इनकी पालना करने के लिए भी हर दिन प्रेरित करना चाहिए। सड़क पर नियमों में अनुसार चलेंगे तो किसी का नुकसान नहीं होगा। ट्रैफिक रूल फॉलो करने से खुद और दूसरों की सुरक्षा होती है। जरा सी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। कमलेशरानी

^अपनेबच्चों के अलावा सड़क पर ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति या बच्चे को समझाना चाहिए। इसको लेकर अभी काफी जागरुक होने की जरुरत है। यह हमारे देश में ही नियमाें को तोड़ने में लोगों को अच्छा लगता है जबकि हर साल सड़क हादसों में कितने लेाग मरते है। अगर हम सड़क पर सही चलें तो कई लेाग बेवहज अपने हाथ पैर तुड़वाने से बच जाएंगे। दीपिका

^18 साल से कम उम्र के बच्चांे को ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए। लेिकन इसके विपरीत पेंरेट्स बच्चों को गाडियां थमा देते हैं। दुकान का यह काम बच्चे गाड़ी ले जाकर कर देंगे तो काम हमें नहीं करना पड़ेगा। टूयूशन छोड़ने जाने की बजाए उन्हें स्कूटर , मोटरसाइकिल देकर अपनी पल्ला झाड़ना। यह हो रहा है। बच्चों को यह समझ नहीं रहा कि उनको जब मां बाप गाड़ी चलाने के लिए कह रहे हैं तो 18 साल से कम उम्र को गाड़ी चलाने पर क्यों पाबंदी है। मिनी

^बच्चोंको घर और स्कूल में ट्रैफिक अवेयरनेस के बारे में गंभीरता से बताना होगा। सड़क पर किसी भी समय निकल जाओ। बच्चे गाडियां चलाते नजर आएंगे। वे जब 18 साल के होते हैं उससे पहले कई गाडियंा चला चुके होते है। पेरेंट्स भी बच्चांे को प्रोस्ताहित करते है। 18 साल से कम उम्र के बच्चे को सड़क पर तेज रफ्तार से चलने में मजा आता है। परिणाम मिलते हैं वे पेरेंट्स की परेशानी बढ़ा देते हैं। नीलमराणा

^आज सड़क पर ज्यादातर एक्सीडेंट मंे देखा जा रहा है तो युवा ही जान खो रहे हैं। ओवर स्पीड, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट के बच्चे गाडियां चला रहे है। हम सभी पेरेंट्स को भी जरुरत है कि ऐसा करने के लिए बच्चों को रोका जाए। अगर नाराज भी हों तो उनको अच्छे तरीके से समझाएं कि ऐसा करना गलत है। सड़क पर जरा सी टक्कर के बाद कुछ नहीं बचता है। बाद में पछताना ही पड़ता है, इसलिए पहले ही संभलकर चलें और अपने अपने बच्चों को समझाएं। दीपा,

^जीरकपुरमंे जो हादसा हुआ उसके बारे में जानकर पता चला कि हम अपने बच्चों को सही दिशा में नहीं ले जा पा रहे है। सड़क पर तेज रफ्तार से गाडी चलाने से क्या हासिल होता है। इसलिए सड़क पर बच्चों को गाड़ी तभी चलाने को दें जब वे पूरी तरह से समझदार हो चुके हों। सड़क पर कब कहां कैसे हादसा हो जाए किसी को पता नहीं चलता है। इसलिए हमेशा सावधान रहें। चंद्रकला

^मैं सभी बच्चों को कहती हूं कि बेटा जब तक आप 18 साल के नहीं हो जाते हाे तब तक सड़क पर गाड़ी चलाओ। अपने और दूसरे के जीवन के बारे में सोचो। हरेक पेरेंट्स को बच्चों काे समझाना चाहिए कि तेज रफ्तार के बाद अगर कोई हादसा होता है तो यह सारी जीवन को खराब कर सकता है। इसलिए बच्चों को गाडी की चाबी नहीं देनी चाहिए। तो मोटर साइकिल की और अन्य गाड़ी की। सड़क होने वाले हादसों से सबक लेना चाहिए। शकुंतलाशर्मा

^पेरेंट्सके कारण ही बच्चे बिगड़ रहे हैं। उनको घर से ही गाड़ी मिल जाती है। वह सड़क पर भी चलते समय कुछ नहीं सोचते हैं। स्कूल के बच्चे बाइक और अन्य वाहनों पर ऐसेे फिरते हैंै कि उनको किसी का डर नहीं है। पेरेंट़स को चाहिए की बच्चों को ट्रैफिक रूल के बारे जागरुक करें। तब तक गाड़ी देने के हक में नहीं होना चाहिए जब तक की वे इससे हाेने वाले नुकसान से परिचित हों। झावीदेवी

^मैं अपनी बेटी को गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं देती हूं। पर मेरे पति बच्चों पर प्यार लुटाने के चक्कर में गाड़ी देते है। यह गलत बात है। बच्चे मां बाप के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। पर इसका यह अर्थ नहीं कि उनकी सभी फरमाइशें पूरी करें। बच्चों को सड़क पर चलने के बारे में बताना चाहिए। जब तब 18 साल के नहीं हो जाते तब तक किसी भी पेरेंट्स को बच्चों के हाथाें में गाड़ी नहीं देनी चाहिए। इससे बच्चों को सही गलत की पहचान होने लगेगी। सुनीताजैन

^बच्चोंको तब तक गाड़ी या दोपहिया वाहन नहीं देने चाहिए जब तक कि उनका लाइसेंस नहीं बन जाता है। सरकार ने इसके लिए उम्र निर्धारित की है। फिर हम उसके अलग कैसे जाएं। अगर किसी का बच्चा बालिग नहीं है तो उस बच्चे को समझाना पेरेंट़्स का फर्ज है कि वह तब तक गाड़ी नहीं चल सकता है जब तक कि वह बालिग नहीं हो जाता है। उसे सड़क पर खुद और दूसरों की सुरक्षा की समझ होनी चाहिए। अनुशर्मा