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सीवेरज कलेक्शन और डिस्पोजल सिस्टम कभी भी दे सकता है जवाब
शहरकासीवेज सिस्टम कभी भी फेल हो सकता है। वजह यह है कि सीवरेज कलेक्शन और डिस्पोजल सिस्टम के लिए कोई पैरामीटर तय नहीं किए गए। रोजाना कितना सीवेज घरों और कमर्शियल बिल्डिंगों की सीवरेज इन लाइनों मिल रहा हैं इसका आंकलन तक नहीं है। कई कॉलोनियों में सीवरेल लाइनंे बंद होने लगी है।
गत 10 सालों में ही सीवरेज लाइनांे का चोक हो जाने का मतलब है कि यह समस्या आगे और विराट रुप लेगी। जीरकपुर एमसी ने 10 साल पहले यहां रिहायशी कॉलोनियों के अंदर जो सीवरेज लाइनें डाली उस समय यह अंदाजा नहीं था कि आबादी बढ़ने पर सबसे पहला भार सीवरेज लाइनों पर ही पड़ेगा। उस समय तंग सीवरेज लाइनें डाली गई। जो अब जवाब देने लगी है। आगे लगातार मकानों की संख्या बढ़ रही हैं। मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट बन रहे हैं। यहां सीवरेज प्लांट बनाना चाहिए।
सीवरेज लाइनों पर दबाव बढ़ गया है
^शहरमें सीवरेज लाइनों पर दबाव बढ़ गया है। इस कारण कई जगहों पर लाइनें ब्लाॅक हो जाती हैं। इसका काेई समाधान निकाला है। सीवरेज लाइनों के ब्लाॅकेज को खालने का काम जीरकपुर एमसी करती है। लेकिन इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि जिस एरिया में सीवरेज लाइनें छोटी है वहां बड़ी बिल्डिंगों को तभी पास किया जाता है, जब वहां सीवरेज के लिए कोई दिक्क्त आए। -परमिदंरसिंह, ईओनगर परिषद जीरकपुर
पाइप डाले गए हैं
^यहांकई सीवरेज लाइनें कम क्षमता की है। पतले पाइपें डाले गए हैं। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यहां भविष्य में इस तरह से आबादी बढ़गी और ये पाइपें कम पड़ जाएंगी। इसलिए अब इनका हल यही है कि जितने मकान बन रहे हैं वे एमसी के मास्टर प्लान के हिसाब से बनें। यहां कई लोग तीसरी मंिजल बनाकर िकराए पर चढ़ा रहे है। एक मकान िजतने ज्यादा लोग रहेंगें उससे उनता ही सीवरेज वाटर निकलेगा। इस अनुपात का हिसाब यहां नहीं लगाया जाता है। -अमित
जीरकपुर में दर्जनों होटल, रेस्टोरेंट, और अन्य कमर्शियल बिल्डिंगों का सीवरेज बिना ट्रीटमंेट के ही यहां लाइनों में छोड़ा जा रहा है। जबकि यह गलत है। होटल, रेस्टोरेंट और इस तरह की दुकानों मंे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने चाहिए। ताकि कचरा इन लाइनों में जाए। इससे यहां लाइनें जाम हो जाती है। ऐसा कई बार हो चुका है।
सीवरेज प्लांट हो
शहर में करीब 5 साल पहले सीवरज लाइनों को डालने का काम हो चुका है। इसके बाद भी यहां लगातार कई रिहायशी कॉलो