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ट्रैफिक पुलिस जहां जरूरत है वहां मौजूद नहीं होती
भास्कर डिबेट के तहत हम अपने पाठकों के लिए हर सोमवार लाते हैं शहर और देश से जुड़ा कोई मुद्दा सोश्यो-इकोनॉमिक चेंज से जुड़े पहलू। डिबेट में दैनिक भास्कर कार्यालय बुलाए जाते हैं शहर के जाने-माने लोग, जो शहर के मसलों को भली-भांति समझते हैं और समस्याओं के हल भी तलाशे जाते हैं। इसी के अंश हम पेश करते हैं, पाठकों के लिए।
जीरकपुर शहर के लोग अब मानने लगे हैं कि ट्रैफिक पुलिस को अब एक्सीडेंट में जाने वाले लोगों से कोई मतलब नहीं है। चाहे जितना भी शहर में हालात खराब हो जाएं। उसके बाद भी पुलिस शहर में हालात सुधारने की बजाए अपने रोजाना के काम में व्यस्त रहेगी। उसको बस ट्रकों को चेक करना है। चाहे उनके सामने से ही िवदाउट हेलमेट वाहन चालक गुजरते रहें। रॉन्ग साइड ड्राईविंग करके लोग जाएं। जबकि शहर में रॉन्ग साइड ड्राइविंग इलीगल कट्स की एक्सीडेंट हो रहें हैं और लोगों की जान जा रही है। कम से लोगों को उम्मीद होती है िक ट्रैफिक कर्मी लाइट पॉइंट पर तो ट्रैफिक कंट्रोल करेंगे। यहां तो ट्रैिफक कर्मी लाइट प्वाइंट से भी नदारद रहते हैं। ऐसे में लोगों का विश्वास कैसे उनपर कायम रहेगा। उनको बार-बार परेशान ही होना पड़ेगा। तेज रफ्तारी पर भी कोई लगाम नहीं। बुजुर्गों को तेज रफ्तारी सबसे ज्यादा दिक्कत होती उकसे बाद भी पुलिस मौन रहती है। अगर पुलिस सख्ती करे तो शहर में ट्रैफिक रूल्स तोड़ने वालों की खैर नहीं। निमय तोड़ने वाले अपने आप नियम मानने लगेंगे। चंड़ीगढ़ ही नहीं जीरकपुर जितना बुरा हाल तो पंचकूला में भी नहीं है। यहां पर भी लोग हैलमेट पहनकर निकलते हैं। जीरकपुर में जिसने हेलमेट पहनलिया उसको लगता है कि शायद वो एकेला इंसान है जो हेलमेट पहनता है। हेलमेट तो हमारे सेफ्टी के लिए ही पहना जाता है। इसलिए है हमारी शहर की पुलिस बहुत ही ढीली है।
यहां पटियाला चौक पर तो बहुत ज्यादा बुरा हाल है। एक तो इंक्रॉचमेंट दूसरा रॉग साइड ड्राईविंग करके लोग आते हैं। ऐसे में यहां पर पहले कई बडे हादसे हो चुके हैं। उसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस मौन बैठी है। ऐसे में लोगों को हराशमेंट होती है। कई बार तो यहां पर ट्रैफिक बीच में ही रुक जाता है। ट्रैफिक पुलिस को भी भली भंाती पता है। उसके बाद भी वो यहां के हालात ठीक कराने के लिए कडे़ कदम नहीं उठा रही है। ट्रैफिक पुलिस को सारा दारोमदार अपने कंधों पर लेकर यहां पर ट्रैफिक समस्या हल करानी च