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ऑटो चालक करते हैं मनमानी, पैसेंजर से मांगते हैं ज्यादा किराया
जीरकपुरकीजनता अब ऑटो चालकों से तंग चुकी है। लोगों का कहना है कि किराए के मामले में ऑटो चालक बहुत ज्यादा ज्यादती कर रहे हैं। वो लोगों की मजबूरी देखकर हर से ज्यादा किराया मांग लेते हैं, जिस को देना मुश्किल होता है। मजबूरी में लोगों को किराया देना पड़ता है। क्योंकि उनके पास ऑटो में आने के अलावा और कोई चारा बचता नहीं है। यही नहीं दिन में अंबाला से आने वाली बसें लोगों को फलाइओवर के पहले ही स्टॉप पर उतार देती हैं। उस समय कोई दूसरी बस नहीं होती है। वहीं पर जब बस होने के कारण लोग ऑटो चालक से ढ़कोली या बलटाना जाने की बात करते हैं तो वो 150 से 200 रुपए मांगते है। जो की बर्दाश्त के बाहर हो चला है। इतना किरया केवल पांच से छह किलोमीटर के लिए बहुत ज्यादा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इनके इल लीगल स्टैंड को बंद कर दिया जाए। उसके बाद इनको एक सीमित किराया निश्चित किया जाए। जिससे ऑटो चालक ज्यादा पैसे मांग सकें। शहर मेंें अब करीब 8 इललीगल ऑटो स्टैंड बन चुके हैं। इनकी वजह से रोजाना ट्रैफिक प्रभावित हाेता है। उसके बाद भी ट्रैफिक पुलिस इनके चालान नहीं करती वहीं पर एमसी इन को यहां से हटाती नहीं है। हाईवे पर बनी सड़क के आधे हिस्से पर इनका कब्जा होता है। जिससे आवाजाही में दिक्कत पैदा होती है। लाेगों ने कहा है कि प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम आदमी की परेशानी दूर हो सके।
हमारे यहां पर लोगों को अगर रात के समय ऑटो से चंड़ीगढ़ जाना हो तो आपको कम से कम 250 रुपए खर्च करने होंगे। ऐसे में कहां से लोगों को राहम मिल सकती है। जब ऑटो चालक खुद इतनी मनमानी पर उतर आए हों। यह तो बहुत ज्यादा किराया है। इतनी ज्यादा महंगाई भी नहीं बढ़ी है कि ऑटो चालकों को 250 मांगने की नौबत गई है।
-सुशांतसिंह
रात को अगर ऑटो चालक को आप कहेंगे कि ढ़कोली जाना है। तो वो अंबाला रोड पर बने बस क्यू शेल्टर से ढ़कोली रेलवे फाटक दूसरी ओर आने के लिए सीधा 150 से 200 मांगेंगे। उनको पता है सवारी पैदल है। ऊपर से रात है। उसको घर जाने की जल्दी होगी ऐसे में मुंह मांगा किराया मिल जाएगा। यह उनकी मजबूरी है। -मनोहरलाल
क्या कहते हैं लोग