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राष्ट्रीय लोक अदालत में एक दिन में 24 हजार मामलों का निपटारा

7 वर्ष पहले
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नागपुर। नागपुर में हुई दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत को भारी प्रतिसाद मिला। एक दिन में 24 हजार 71 मामलों का निपटारा हुआ। विशेष अभियान के तहत 8601 मामले निपटाए गए। इसके साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता का ग्राफ 76 फीसदी हो गया है। विधि सेवा प्राधिकरण नागपुर की तरफ से आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 31,136 मामले रखे गए। इसमें से 24,071 मामलों का निपटारा आपसी समझौते से हुआ। 34 साल पुराना 1980 का आपराधिक मामला भी आज खत्म हो गया। हुमदेव फटिंग ने 1980 में लकड़गंज थाने में कृष्णराव पौनीकर व उरकुडा भुजभुजे के खिलाफ भादंवि की धारा 324 के तहत मामला दर्ज कराया था।
आपसी समझौते से खत्म किया गया। 1983 में सीताबर्डी में दर्ज धोखाधड़ी के मामले का भी पटाक्षेप हुआ। 30 साल पुराना स्कूटर चोरी का प्रकरण भी आज खत्म हो गया। विशेष अभियान के तहत मामूली विवाद के 8601 मामले निपटाए गए। एक दिन में 24,071 मामले निपटाने से प्रलंबित प्रकरणों की संख्या 6 फीसदी से कम हो गई है। लोक अदालत की सफलता का ग्राफ 76 फीसदी हो गया है। 6 करोड़ 86 लाख समायोजन शुल्क वसूला गया।
33 लाख 46 हजार का जुर्माना भी वसूला गया। चेक बाउंस के मामलों में भी 10 फीसदी की कमी हो गई है। चेक बाउंस प्रकरणों में 2 करोड़ रुपए समायोजन शुल्क वसूला गया। मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में 3 करोड़ का समायोजन शुल्क वसूला गया। लोक अदालत के लिए कुल 94 पैैनल बनाए गए थे। हर पैनल में एक न्यायाधीश, वकील, समाज सेवक व विधि महाविद्यालय के विद्यार्थी शामिल थे।

लोक अदालत प्रभावी तंत्र
“लोक अदालत मामला निपटाने का प्रभावी तंत्र है। इससे वादी व प्रतिवादी दोनों के समय व पैसे की बचत होती है। इससे प्रलंबित मामलों की संख्या भी कम होती है।”
किशोर सोनावणे, प्रमुख जिला न्यायाधीश
“लोक अदालत में आपराधिक, दिवानी, मोटर वाहन, भूसंपादन व चेक बाउंस सहित सभी प्रकार के मामलों का निपटारा हुआ। जिस्पा के लिए विशेष पैनल बनाया गया था।”
- किशोर जयस्वाल, विधि सेवा प्राधिकरण नागपुर के सचिव।
नवदंपति को मिलाया
लोक अदालत के माध्यम से अलग-अलग रह रहे नवदंपति को फिर एक बार साथ आने का मौका मिला। राधिका (काल्पनिक नाम) का विवाह 25 मई 2013 को राजेश (काल्पनिक नाम) से हुआ था। विवाह के दूसरे दिन से ही दोनों में मामूली विवाद होने लगे। दोनों अलग-अलग रहने लगे। राधिका विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव के पास पहुंची। इनका मामला लोक अदालत में रखा गया और आपसी समझौते से इस मामले को समाप्त किया गया।