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मुंबई में बम धमाके कर इंडियन मुजाहिदीन ने मनाया था कसाब का जन्मदिन

7 वर्ष पहले
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मुंबई। 13 जुलाई 2011 को मुंबई में हुए तीन बम धमाकों ने देश को हिलाकर रख दिया था। इन सीरियल ब्लास्ट के चार साल पूरे होने जा रहे हैं। dainikbhaskar.com इस मौके पर बता रहा है इन धमाकों से जुड़ी हर बात जो जानना चाहते हैं आप। उस समय जो खबरें सामने आईं थीं उनके अनुसार 13 जुलाई को ही आतंकी कसाब का जन्मदिन था और यह धमाके उसकी शान बढ़ाने के लिए इंडियन मुजाहिदीन ने किए थे। इस आतंकी संगठन के प्रमुख यासीन भटकल ने कहा था कि उसे ये धमाके कराने पर गर्व है। इस घटना में 31 लोगों की मौत हो गई थी और 500 लोग घायल हो गए थे।
इंडियन मुजाहिदीन ने दिया कसाब को इनाम- 13 जुलाई को मुंबई में 26/11 के अपराधी अजमल आमिर कसाब का जन्मदिन भी था। उसे फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी। इसलिए माना जा रहा है कि आंतक के आकाओं ने अपने बहादुर सिपाही को उसकी बहादुरी का इनाम देने के लिए ये धमाके कराए। बम विस्फोट कराने का पूरा प्लान आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के फाउंडर यासीन भटकल ने कराए थे। उस दिन मुंबई के लोग दिनभर के कामकाज के बाद अपने घर जा रहे थे। लेकिन सिर्फ पांच मिनट के अंदर शहर के तीन सबसे व्यस्त इलाकों झवेरी बाजार, दादर और ओपेरा हाउस में तीन बम धमाकों में 31 लोगों की मौत हो गई। शुरूआती तौर पर अनुमान लगाया गया कि हमले लश्कर ए तैएबा और इंडियन मुजाहिदीन ने कराए हैं।
पांच मिनट में तीन धमाके- उस दिन बुधवार था। शाम करीब 6.45 से 7.00 के बीच ये धमाके हुए। पहला धमाका 6.45 पर झवेरी बाजार में, दूसरा 6.55 पर दादर में और तीसरा धमाका 7.00 बजे ओपेरा हाउस के पास हुआ। इस घटना से हरकत में आई मुंबई पुलिस को दो जिंदा बम भी मिले थे। ये बम ग्रांट रोड सांताक्रूज में मिला था। विस्फोटों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद देश भर से शाम छह बजे से लेकर सात बजे तक पाकिस्तान के लिए किए गए कॉल्स की जांच भी की गई। 18 जुलाई 2011 को मामले की जांच का जिम्मा एटीएस को सौंप दिया गया था। एटीएस चीफ की मानें तो तफ्तीश के दौरान कुल 12 हजार 3 सौ 73 लोगों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान 18 राज्यों में धमाकों के सुराग की तलाश की गई और लगातार 29 दिनों तक तकरीबन 1 सौ 80 घंटे के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया। धमाका करने वालों को डेढ़ लाख रुपए दिए थे। यह पैसे यासिन भटकल ने मुहैया कराए थे।
हर जगह खून
मुंबई में 13 जुलाई 2011 को हुए बम धमाके पहले की तुलना में ज्यादा ताकतवर थे। इसमें उन्नत किस्म के विस्फोटों का उपयोग किया गया था। घटनास्थल के आसपास की इमारतें भूंकप की तरह कांप गई थीं। सीसे फूट गए और घरों के अंदर रखा सामान गिर गया था। जहां बम विस्फोट हुए वहां का मंजर तो और भी ज्यादा दिल दहला देने वाला था। लोग खून से सने छटपटा रहे थे। मरे हुए लोगों के चिथड़े दूर-दूर तक बिखर गए थे। जिन्हें बमुश्किल समेटा गया।
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