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तीन और कंपनियों के नूडल्स की क्वालिटी खराब निकली

5 वर्ष पहले
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मुंबई/बाराबंकी. मैगी के बाद अब दूसरी कंपनियों के नूडल्स भी खराब क्वालिटी के पाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की जांच में तीन कंपनियों के नूडल्स में राख तय लिमिट से ज्यादा मिली है। बता दें कि पिछले साल नेस्ले की मैगी के सैम्पल भी यूपी में हुई टेस्ट में फेल हो गए थे। इसके बाद मैगी पर बैन लगा था। मई में लिए गए थे सैम्पल...
- यूपी के बाराबंकी जिले के फूड सेफ्टी अफसर संजय सिंह ने बताया, "पिछले साल मई में एक मॉल से नॉर सूपी नूडल्स, हॉर्लिक्स फूडल्स और चिंग्स हॉट गार्लिक इन्सटैंट नूडल्स के सैम्पल लिए गए थे।
- इन्हें जांच के लिए लखनऊ के सरकारी लैब में भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट दो हफ्ते पहले आई है।
- जांच में पाया गया कि टेस्टमेकर में राख की मात्रा तय लिमिट से ज्यादा है।
- बता दें कि राख की क्वान्टिटी एक फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन तीनों प्रोडक्ट में यह ज्यादा थी।
- जांच के आधार पर तीनों प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों को हफ्ते भर पहले नोटिस भेजा गया। उनसे एक महीने में जवाब मांगा गया है।
क्या बोली कंपनी...
- इस बारे में पूछने पर जीएसके कंज्यूमर हेल्थकेयर के स्पोक्सपर्सन ने कहा, "हम एफएसएसएआई की मंजूरी के आधार पर ही फूडल्स बनाते हैं। बाजार में जो भी फूडल्स मिलते हैं, वे सभी इसी के मुताबिक तैयार किए गए हैं।"
- नॉर नूडल्स बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्रवक्ता ने कहा, "उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी अथॉरिटी का यह कहना गलत है कि हमारा प्रोडक्ट 'सब-स्टैंडर्ड' है। हम रेग्युलेटर के सामने अपनी बात रखेंगे।"
- चिंग्स नूडल्स बनाने वाली कैपिटल फूड्स से संपर्क नहीं हो सका।
मैगी में ज्यादा मिला था लेड
- पिछले साल मई में उत्तर प्रदेश के ही फूड सेफ्टी डिपोर्टमेंट ने मैगी नूडल्स में लेड (सीसा) और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) की ज्यादा मात्रा पाई थी।
- जून में एफएसएसएआई ने नुकसानदायक बताते हुए मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी।
- मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट गई। कोर्ट ने नवंबर में बिक्री पर रोक हटा दी। फिलहाल, मामला सुप्रीम कोर्ट में है। उसने बिक्री पर रोक नहीं लगाई है।
आगे की स्लाइड्स में जानें किस नूडल्स में कितनी ज्यादा मिली राख...
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