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पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से सैकड़ों बच्चे बीमार, हड़कंप

5 वर्ष पहले
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अमरावती/जयपुर. नेशनल डी-वॉर्मिंग डे पर बुधवार को देशभर की स्कूलों में बच्चों को पेट के कीड़े मारने के लिए एलबेंडाजॉल नामक दवा खिलाई गई। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इस दवा के खाने के बाद बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबर से हड़कंप मच गया। बाद में कुछ बच्चों की तबीयत संभल गई।
कई बच्चों को बेहोशी व उल्टी होने की शिकायत के बाद अस्पताल भी ले जाया गया। महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शिवाजी कन्या स्कूल में गोलियां खाने से करीब 60 से 70 छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से 12 की हालत गंभीर है।
जिसके बाद सभी पीड़ितों को मोर्शी के उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसकी सूचना मिलते ही लोगों की भीड़ मोर्शी के उपजिला अस्पताल में जुट गई। कुछ समय के लिए यहां अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। गंभीर रूप से बीमार छात्राओं को इर्विन अस्पताल रेफर किया गया।
27 करोड़ बच्चों को दवा देने का लक्ष्य
नेशनल डी-वॉर्मिंग डे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 500 जिलों के 27 करोड़ बच्चों को दवाई देने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल के 9 करोड़ से ज्यादा हैं। राजस्थान में 200, मध्यप्रदेश में 300, बिहार में 180 और छत्तीसगढ़ में भी सौ से ज्यादा बच्चे दवा खाने के बाद बीमार हो गए।
हरियाणा के सोनीपत में 16 स्कूली बच्चे बीमार पड़ गए। उत्तरप्रदेश के आगरा में भी कई बच्चों ने चक्कर आने की शिकायत की। पंजाब में पूरी दवाओं का स्टॉक नहीं आने से इसका वितरण रोक दिया गया।
अमरावती के कुछ ही स्कूलों में हुआ वितरण
जानकारी के मुताबिक, अमरावती जिले के कुछ स्कूलों में गोलियों का वितरण नहीं किया गया। जबकि जिले के मोर्शी तहसील के अधिकांश स्कूलों में यह गोलियां वितरित की गईं। शिवाजी कन्या स्कूल में दोपहर भोजन के बाद छात्राओं को गोलियां वितरित की गईं।
वहीं, अमरावती के जिला स्वास्थ्य अधिकारी आसोले ने बताया कि ग्रामीण इलाको में 3 लाख 65 हजार छात्राओं को गोलियां बांटी गईं है, लेकिन शिवाजी कन्या स्कूल में ही दवा खाने से छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। यह मामला खिचड़ी बांटे जाने व स्कूल में उपयोग में लाए जानेवाले पानी से भी हो सकता है। खिचड़ी व पानी के सैंपल लिए गए हैं।
इनकी हालत गंभीर
कुछ बच्चों को गंभीर हालत में मोर्शी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल रेफर किया गया। इसमें सानिका विनायक पकड़े (13), गायत्री प्रकाश नागोशे (15), सादिया परवीन अजीम खान पठान (12), प्रतीक्षा अनिल मोहोड़ (13), अपेक्षा प्रेमदास राऊत (11), वैष्णवी लक्ष्मणराव उके (11) शामिल हैं। इसके अलावा कुछ और बच्चों को रेफर किया गया है।
डॉक्टरों की राय
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को दी जाने वाली दवाई विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित है। इसके बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा, अमूमन इस दवा को खाली पेट नहीं लिया जाना चाहिए।
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