- फ्री बेसिक्स को लेकर ट्राई पर दबाव बनाने के लिए फेसबुक ने बड़ा अभियान चलाया था। फेसबुक ने अखबारों में बड़े-बड़े ऐड दिए थे।
- ट्राई के चेयरमैन आरएस शर्मा ने कहा था कि फ्री बेसिक्स के सपोर्ट के लिए फेसबुक को हासिल हुए 14.34 लाख कमेंट्स के दबाव में ट्राई नहीं आएगा।
- शर्मा ने कहा था कि ट्राई को मिले सुझाव ओपिनियन पोल नहीं हैं। हमने लोगों से सुझाव मांगे थे, न कि ओपिनियन पोल कराया था।
फेसबुक ने फ्री बेसिक्स प्रोजेक्ट क्यों बंद किया
- इससे पहले, फेसबुक ने भारत में अपने विवादित फ्री बेसिक्स प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। लेकिन दुनिया के करीब 30 देशों में इसे जारी रखा।
- दरअसल, ट्राई ने बीते सोमवार को नेट न्यूट्रैलिटी के हक में फैसला देते हुए डिफरेंशियल प्राइसिंग पर रोक लगा दी थी।
- ट्राई ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि नियमों को तोड़ने पर 50 लाख रुपए का मैक्सिमम जुर्माना देना होगा। टेलिकॉम ऑपरेटर्स को नियमों को लागू करने के लिए छह माह का वक्त दिया गया है।
- ट्राई ने साफ कर दिया कि कंटेंट के आधार पर डाटा सर्विसेस के लिए कोई भी सर्विस प्रोवाइडर अलग-अलग कीमत (डिफरेंशियल प्राइसिंग) का ऑफर नहीं देगा। ट्राई हर दो साल में नियमों का रिव्यू करेगी।
- ट्राई के फैसले का सीधे तौर पर यह मतलब था कि फेसबुक अब फ्री बेसिक्स को जारी नहीं रख सकता।
ट्राई के फैसले के बाद से फेसबुक में बैचेनी थी
- नेट न्यूट्रैलिटी के सपोर्ट में ट्राई का फैसला आने के बाद से फेसबुक में काफी बैचेनी है। फेसबुक के बोर्ड मेंबर मार्क एंड्रीसन के ट्वीट से यह दिखाई दिया।
- मार्क एंड्रीसन ने अपने ट्वीट में नेट न्यूट्रैलिटी पर भारत को गलत करार दिया। यही नहीं, एंड्रीसन ने यहां तक ट्वीट किया कि भारत ब्रिटिश राज के अंडर ही रहता तो अच्छा होता।
- भारतीय यूजर्स के कड़े रिस्पाॅन्स के बाद में एंड्रीसन ने माफी मांगी ली और विवादित ट्वीट डिलीट कर दिए।
- फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को भी एंड्रीसन के ट्वीट पर अफसोस जताया।
क्या था फ्री बेसिक्स?
- इस सर्विस को कोई भी यूजर अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन पर यूज कर सकता था। यहां उसे लिमिटेड सर्विस मिलती।
- फेसबुक ने फ्री बेसिक्स या इंटरनेट डॉट ओआरजी ऑफिशियली शुरू किया था, लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने इसे नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ बताया था। इस पर बहस शुरू हो गई थी।
- विरोध के बाद फेसबुक ने internet.org को Free Basics इंटरनेट के नाम से री-ब्रांड किया।
- पहले यह सर्विस तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और तेलंगाना के यूजर्स के लिए लॉन्च की गई थी।
- बाद में रिलायंस ने इसे पूरे देश के सब्सक्राइबर्स के लिए शुरू कर दिया।
- कोई भी मोबाइल यूजर्स फेसबुक की फ्री बेसिक्स ऐप के जरिए फेसबुक, न्यूज, क्रिकेट, जॉब्स, ट्रेन, फ्लाइट्स शेडयूल, हेल्थ, एस्ट्रोलॉजी और ओएलएक्स जैसी सीमित साइट्स और ऐप्स को फ्री में एक्सेस कर सकता था। यूजर्स को इनका इंटरनेट चार्ज भी नहीं देना पड़ता।
- फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने एक पोस्ट कहा था, "कम्युनिकेशन को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे एजुकेशन, हेल्थ और जॉब में बहुत मदद मिलेगी।"
- ट्राई के आदेश के बाद दिसंबर में रिलायंस ने फ्री बेसिक्स को होल्ड पर रख दिया था।
क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?
- अगर आपके पास इंटरनेट प्लान है, तो आप हर वेबसाइट पर हर तरह के कंटेंट को एक जैसी स्पीड के साथ एक्सेस कर सकें।
- न्यूट्रैलिटी के मायने ये भी हैं कि चाहे आपका टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर कोई भी हो, अाप एक जैसी ही स्पीड पर हर तरह का डाटा एक्सेस कर सकें।
- कुल मिलाकर, इंटरनेट पर ऐसी आजादी जिसमें स्पीड या एक्सेस को लेकर किसी तरह की कोई रुकावट न हो।
- नेट न्यूट्रैलिटी टर्मिनोलॉजी का इस्तेमाल सबसे पहले 2003 में हुआ। तब काेलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टिम वू ने कहा था कि इंटरनेट पर जब सरकारें और टेलिकॉम कंपनियां डाटा एक्सेस को लेकर कोई भेदभाव नहीं करेंगी, तब वह नेट न्यूट्रैलिटी कहलाएगी।
- नेट कम्युनिटी का दावा है कि अगर कंपनियां फ्री बेसिक्स जैसा मॉडल अपनातीं तो यूजर्स को हर एक्स्ट्रा साइट या ऐप के लिए अलग चार्ज देना पड़ता या उन्हें नेट की स्पीड काफी कम मिलती।