नई दिल्ली/मुंबई. महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। लेकिन प्रदेश की महिलाओं को लेकर एक और अच्छी बात सामने आई है। वह है- अपने खिलाफ हो रहे किसी भी अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना। दरअसल देशभर की निचली अदालतों में दो करोड़ से ज्यादा केस लंबित हैं।
इनमें 13% मुकदमे महिलाओं ने ही दर्ज किए हैं। इनमें भी महाराष्ट्र की महिलाएं ही सबसे आगे हैं। फिर उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु की महिलाओं का नंबर है। नेशनल ज्युडिशियल डाटा ग्रिड के 14 फरवरी तक आंकड़ों में यह तथ्य सामने आए हैं। इसके अनुसार महिलाओं ने कुल 28 लाख 64 हजार 124 केस दर्ज कराए। इनमें महाराष्ट्र की महिलाओं द्वारा सर्वाधिक 11,46,553 केस दर्ज कराए गए हैं।
दीवानी से ज्यादा फौजदारी के मामले
कुल 2864124 मुकदमों में से 13,09,332 केस दीवानी और 15,54,792 केस फौजदारी के हैं। गैर-आपराधिक यानी दीवानी केस का मतलब है निजी संपत्ति के अधिकार, करार के उल्लंघन, तलाक, मृत्युपत्र, लापरवाही और कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े हैं। वहीं आपराधिक यानी फौजदारी केस में आम तौर पर सरकार ही दाखिल करती है। वह भी किसी कानून का उल्लंघन करने पर जिसमें सजा और जुर्माने या दोनों का प्रावधान होता है।