नागपुर. मकोका में फरार गैंगस्टर संतोष आंबेकर के मकान पर शुक्रवार को अपराध शाखा के अधिकारियों ने छापा मारा। मौके से महत्वपूर्ण दस्तावेज व अन्य सामग्री जब्त की गई, लेकिन संतोष के हाथ नहीं लगने से पुलिस दल को खाली हाथ लौटना पड़ा।
अपराध शाखा के अधिकारी गैंगस्टर संतोष आंबेकर के इतवारी स्थित निवास पर आ धमके। घर में संतोष के माता-पिता व अन्य सदस्य थे। दिन भर चली कार्रवाई के दौरान संतोष के घर के चप्पे-चप्पे की छानबीन की गई। कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, पेनड्राइव, सीडी संपत्ति से जुडे़ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
बरामद सामग्री की प्रयोगशाला में िवशेषज्ञोें से जांच कराई जाएगी, ताकी संतोष की काली कमाई से लेकर हर अवैध गतिविधियां उजागर हो सकें। इससे पुलिस संतोष की संपत्ति की जांच कर उसे जप्त कर सकती है। उल्लेखनीय है कि ताजा मामले में पुलिस ने संतोष समेत उसके गिरोह के ग्यारह सदस्यों के खिलाफ मोका के तहत शिकंजा कसा है। आरोप है कि संतोष ने सोनेगांव क्षेत्र में स्वप्निल बिडवई के मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया है।
हालांकि यह दो लोगों के बीच का विवाद है। जिसमें संतोष कूद पडा। बिल्डर सचिन अडूलकर व स्वप्निल में निर्माण कार्य को लेकर विवाद था। स्वप्निल को धमकाने के लिए प्रकरण में सचिन ने संतोष की मदद ली। ताकी करोड़ों की संपत्ति आसानी से हथियाई जा सके। मामला करोड़ों का होने से संतोष ने भी बिल्डर सचिन का साथ दिया।
जिसके चलते गत कुछ दिनों से वह अपने साथी युवराज माथनकर, गौतम भटकर, संजय फातोडे, आकाश बोरकर, विनोद मसराम, शक्ति मनपिया, प्रकाश मानकर, विजय बोरकर और लोकेश कुहीटकर की मदद से स्वप्निल को धमका रहा था। उसके मकान पर कब्जा करने का प्रयास भी किया जा चुका है। जिससे मामला थाने पहुंचा।
जांच के दौरान सोनेगांव पुलिस को प्रकरण में संतोष की लिप्तता होने का पता चला। इसकी गंभीरता से बिल्डर सचिन, संतोष व उसके गिरोह के खिलाफ पुलिस ने मका के तहत कार्रवाई की। इसकी भनक लगते ही संतोष अपने गिरोह के कुछ सदस्यों के साथ भूमिगत हो गया।
कार्रवाई में यह थे शामिल उपायुक्त रंजनकुमार शर्मा व शैलेश बालकवडे स्वयं कार्रवाई के दौरान संतोष के घर में मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में ही करीब 8 पुलिस अधिकारी व 25 कर्मचारियों ने घर की तलाशी ली।