मुंबई. दुनिया के ज्यादातर देशों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। असर भारत पर भी पड़ रहा है। गुरुवार को शेयर बाजार लुढ़का तो सोना और रुपया भी कमजाेर हुए। तीनों करीब-करीब यूपीए सरकार के समय के स्तर पर पहुंच गए। कच्चा तेल तो 13 साल पुराने भाव पर आ गया है। यानी यूपीए के शुरुआती दिनों की स्थिति पर। 2003-04 में इंडियन बास्केट क्रूड 28 डॉलर/बैरल पर था।
इस गिरावट की तीन वजह...
1. फेड रिजर्व की प्रमुख जेनेट येलेन ने बुधवार को कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बिगड़ रही है। अमेरिका पर भी असर होगा। ब्याज दरें बढ़ाने के भी संकेत दिए।
2. वैश्विक बाजार में सुस्ती के कारण आईटी और दवा कंपनियों का बिजनेस प्रभािवत हुआ है। देश में भी मांग नहीं बढ़ रही। इससे मुनाफा घटा। नतीजे बिगड़े।
3. एसबीआई का मुनाफा दिसंबर तिमाही में 67% कम रहा। वजह बढ़ता एनपीए। सरकारी बैंकों का एनपीए 40% तक बढ़ गया है। देश के सभी बैंकों के एनपीए का 85% सरकारी बैंकों के हिस्से है।
सेंसेक्स : 807 अंक गिरा; 22 महीने पीछे
-एक दिन में 3.4% गिरा बाजार। इस हफ्ते चार दिन में मार्केट कैप 7 लाख करोड़ रु. घट गया।
-आठवीं सबसे बड़ी गिरावट के साथ सेंसेक्स 8 मई 2014 के बाद सबसे निचले स्तर पर। मोदी सरकार के कार्यकाल का भी निचला पायदान है।
-निफ्टी 239 अंक, यानी 3.32% गिरकर 6976 पर आ गया। बाजार में और गिरावट के आसार हैं।
- निफ्टी 6700 तक जा सकता है।
सोना : 215 रु. महंगा, डेढ़ साल पुराने दाम पर
सोना 215 रु. महंगा होकर 28 हजार 800 रु. प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह डेढ़ साल में सबसे ज्यादा है। बाजार में गिरावट के कारण लोग सोने में पैसे लगा रहें। रुपया कमजोर होने से आयात महंगा।
रुपया: डॉलर के मुकाबले ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंचा
रुपए 45 पैसे सस्ता हुआ। एक डॉलर की कीमत 68.30 रु. हाे गई। यह 29 महीने का सबसे निचला स्तर है।
क्रूड: 26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, 13 साल पुरानी कीमत
अमेरिकी क्रूड जुलाई 2014 (106 डॉलर/बैरल) से 70% नीचे है। इंडियन बास्केट 27.72 डॉलर पर है।