नागपुर. राज्य में शिवसेना और भाजपा में चल रहे शीतयुद्ध का असर स्थानीय निकाय पर भी देखने मिल रहा है। चर्चा है कि गठबंधन की शर्त अनुसार उपमहापौर पद अंतिम सवा साल के लिए शिवसेना को मिल सकता है। किन्तु भाजपा नेताओं के रुख को देखते हुए शिवसेना ने अपने तेवर तीखे कर लिए है। वह अब यह पद स्वीकारने के मूड़ में नहीं है।
उसका स्वाभिमान जाग गया। सेना नेताओं का कहना है कि हमारा चुनाव पूर्व गठबंधन था। भाजपा चाहती तो पहले ही सेना को उपमहापौर पद दे सकती थी। तत्कालीन संपर्क प्रमुख विनायक राऊत को दूसरे ढाई साल में उपमहापौर पद देने का आश्वासन दिया था। किन्तु ढाई साल बाद भी नहीं दिया गया।
नेताओं ने कहा कि अब अंतिम मौके पर वह देना भी चाहती है तो हम नहीं लेंगे। पार्टी प्रमुख को स्थानीय नेताओं की भूमिका से अवगत कराया जाएगा। उधर, भाजपा भी इसे लेकर दो राहे पर हैं। शिवसेना को देना है या नहीं, यह अब तक तय नहीं किया। इसका फैसला उसने पार्टी आलाकमान पर छोड़ दिया है। एेसे में स्थानीय स्तर पर भाजपा-शिवसेना के बीच दूरियां और बढ़ सकती है।
वर्ष 2012 में हुए मनपा चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा। इसके िलए शिवसेना से काफी मोलभाव हुआ। कम करते-करते शिवसेना को करीब 18 सीटें दी गई थीं। किसी तरह शिवसेना 6 सीट पर विजयी हुई। किन्तु चुनाव के बाद भाजपा ने शिवसेना को किनारे कर दिया। उपमहापौर पद देने से इनकार कर दिया।
चर्चा के मुताबिक, भाजपा ने ढाई-ढाई साल के लिए चार उपमहापौर देने का निर्णय लिया था। प्रथम तीन उपमहापौर नागपुर विकास आघाड़ी कोटे से और अंतिम उपमहापौर शिवसेना को देने का निर्णय हुआ था। इस संबंध में तत्कालीन सेना संपर्क प्रमुख विनायक राऊत से भी चर्चा हुई थी।
सेना को पहले ढाई साल बाद और बाद में अंतिम सवा साल के लिए उपमहापौर पद देने का आश्वासन दिया। फिलहाल उपमहापौर मुन्ना पोकुलवार को स्थायी समिति में सदस्य के तौर पर चयनित किया गया है। ऐसे में अगले महीने वे उपमहापौर पद छोड़कर स्थायी समिति में चले जाएंगे। जिसके बाद उपमहापौर पद रिक्त होगा। चर्चा है कि शिवसेना को यह पद मिल सकता है।
किन्तु भाजपा में भी इसपर अभी तक कोई आम राय नहीं बनी है। सेना को उपमहापौर पद देने के सवाल पर नेता अनभिज्ञता जता रहे। उधर, शिवसेना ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। वह अब और ज्यादा अपमान सहने को तैयार नहीं है। सीधे-सीधे उसने यह पद लेने से ही इनकार कर दिया है। जिससे दोनों के बीच आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने की जानकारी है।
पार्टी नेता के सामने रखेंगे भूमिका : कुमेरिया
मनपा में शिवसेना गटनेता किशोर कुमेरिया ने कहा कि हम यह पद लेने के इच्छुक नहीं है। देना था तो पहले देते। पार्टी नेताओं के सामने अपनी भूमिका रखेंगे। जिसके बाद पार्टी जो निर्णय लेगी, उसे स्वीकार किया जाएगा।
अब तक चर्चा नहीं : तिवारी
मनपा में सत्तापक्ष नेता दयाशंकर तिवारी ने कहा कि अगला उपमहापौर किसे बनाना है, इसे लेकर अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है। पार्टी के बड़े नेता इसपर निर्णय लेंगे।