सोशल मीडिया पर हिंदी का बोलबाला, गर्व के साथ प्रयोग करने लगे हैं लोग / सोशल मीडिया पर हिंदी का बोलबाला, गर्व के साथ प्रयोग करने लगे हैं लोग

बात वाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर की हो या हो ब्लॉगर्स की, सभी हिंदी भाषा का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं।

Sep 14, 2017, 07:39 AM IST
नागपुर. भले ही इन दिनों ‘ग्लोबल लैंग्वेज’ का चलन है, लेकिन सोशल मीडिया पर हिंदी का ही बोलबाला है। पहले हिंदी भाषिक लोगों के लिए सोशल मीडिया पर काम करना बड़ा ही मुश्किल था, लेकिन आज तो सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग हिंदी भाषा का प्रयोग न केवल खुलकर, बल्कि गर्व के साथ करते हैं। कुछ समय पहले ‘हिंगलिंश’ भी खूब चलन में रहा। बात वाट्सअप, फेसबुक, ट्विटर की हो या हो ब्लॉगर्स की, सभी हिंदी भाषा का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। युवा पीढ़ी विशेष रूप से इसमें शामिल हैं। अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के दौर ने ‘अनुवादकों’ की उपयोगिता पर बल दिया तो गूगल ट्रांसलेटर जैसे अनेकों ‘एप’ के कारण वे धीरे-धीरे हाशिए पर होते गए। खास एप ने रही-सही कसर पूरी कर दी। अब तो ऐसा है कि दूसरे भाषा में भी कोई बात बोली जाए तो हिंदी ट्रांसलेटर से अपने-आप वह भाषा हिंदी होने लगती है।
#हिंदी में की जा रही चैटिंग
चाहे वाट्सअप हो या फेसबुक, हम सभी फ्रेन्ड्स ‘चैट’ हिंदी में ही करते हैं। स्कूल के अलावा घर और बाहर हिंदी भाषा का ही प्रयोग करते हैं। अगर कोई फ्रेंड अंग्रेजी में बात करता है तो हम कहते हैं िक भाई तू विदेश क्यों नहीं चला जाता।
- नवनीत भंडारी, नागपुर
#हिंदी में रेसिपी होने से आसानी
सोशल साइट यू ट्यूब पर हिंदी में रेसिपी होने से बहुत आसान हो गई है। जो सामग्री दी जाती है उसके नाम ऐसे होते हैं िक समझ में ही नहीं आते, पर हिंदी में रेसिपी होने से बहुत सारी िडशेज बनाना आसान हो गया है। नई नई रेसिपीज भी सीख पा रहे हैं।
-निकिता नघरानी, सदर
अलग दिखने का बेहतर तरीका
सोशल मीडिया पर हिंदी का प्रयोग भीड़ से अलग दिखने का आकर्षक तरीका साबित हुआ है। हमारे कॉलेज में हिंदी भाषियों का एक ग्रुप है, जिसके सभी सदस्य केवल िहन्दी में ही बात करते है। उस ग्रुप में दूसरी िकसी भाषा में बात करना बिल्कुल मना है।
-निखिल खंडूजा, अंबाझरी रोड
ब्लागर्स की संख्या बढ़ी
हिंदी ब्लाॅगर्स की संख्या भी बढ़ रही है। ज्यादातर सेलिब्रिटीज भी हिंदी में ब्लाॅग लिखते हैं। ग्लोबल लैंग्वेंज के चलन के बावजूद हमें िहन्दी भाषा का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए, ताकि उसे बढ़ावा मिल सके।
-रूपल खंडेलवाल,खामला चौक
एप से भी सीख रहे
पहले हिंदी के लिए कोई एप नहीं हुआ करता था। ट्रांसलेशन में बहुत दिक्कत होती है। पर अब गूगल ट्रांसलेटर जैसे एप से ये सब बहुत आसान हो गया है। कुछ भी हो उसे तुरंत ट्रांसलेट िकया जा सकता है।
-विश्वदीप, प्रताप नगर
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