पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

आदर्श घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण मामले में सवालों के घेरे में सीबीआई

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मुंबई. आदर्श घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का नाम मंजूरी के अभाव में हटाने के निर्णय को लेकर सीबीआई सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सवालों में घिरी नजर आई। हाईकोर्ट ने कहा कि जब सीबीआई के पास मंजूरी नहीं थी तो आरोपपत्र में नाम शामिल क्यों किया? इस तरह के आरोपपत्र का क्या मतलब है? न्यायमूर्ति एमएल टहिलियानी ने यह सवाल सीबीआई की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई के दौरान किए।
यह आवेदन निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ दायर किया गया है जिसके तहत अदालत ने सीबीआई के चव्हाण का नाम आरोपपत्र से हटाने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चव्हाण के खिलाफ निचली अदालत में दायर आरोपपत्र के आधार पर किसी तरह की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।
राज्यपाल ने मंजूरी देने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे वकील हितेन वेणेगांवकर ने कहा कि हमने राज्यपाल के पास चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी को लेकर प्रस्ताव भेजा था। राज्यपाल ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इस दौरान न्यायमूर्ति ने सीबीआई से सीआरपीसी की धारा 321 के तहत आवेदन न करने को लेकर सवाल किए।
उन्होंने कहा कि वे एक सप्ताह बाद मामले को लेकर व्यापक रुप से सुनवाई करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक सीबीआई को मंजूरी की जरूरत नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोड़कर ने भी एक आवेदन दायर किया। आवेदन में तिरोडकर ने दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा
चलाने के लिए सीबीआई को मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।