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कोल्हापुर में सरकार विरोधी लहर, टोल व एलबीटी हैं अहम मुद्दे

7 वर्ष पहले
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मुंबई. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गढ़ में ही सरकार विरोधी लहर दिखाई दे रही है। कोल्हापुर में टोल टैक्स का मामला विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनने वाला है। दुकानदारों से लेकर आम शहरी तक सभी सरकार विरोधी सुर अलाप रहे हैं। सरकार विरोधी रुख का फायदा शिवसेना को मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि भाजपा यहां कमजोर स्थिति में है। पिछल दिनों हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद राकांपा ने कोल्हापुर लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में यह स्थिति नहीं दिखाई देती। कोल्हापुर सहित आसपास के जिले सांगली और सातारा लंबे अरसे से राकांपा के क्षेत्रीय क्षत्रपों के प्रभाव वाले इलाके हैं, लेकिन फिलहाल यहां के लोग राकांपा-कांग्रेस सरकार से खुश नहीं हैं। सांगली लोकसभा चुनाव में भाजपा के संजय काका पाटील को जीत मिली थी।
हवा बदली

सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी रामराव चौंगुले कहते हैं कि हवा बदली हुई है। यहां गांव-गांव में कांग्रेस-राकांपा की जडें गहरी हैं, लेकिन इस वक्त शिवसेना की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर के भीतर मिठाई की दुकान चलाने वाले गणेश क्षीरसागर कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर यहां पर है। अब तक राकांपा के समर्थक रहे क्षीरसागर कहते हैं कि इस बार बदलाव के लिए शिवसेना का साथ देंगे।
टैक्स से जूझ रही जनता

एक साप्ताहिक समाचार पत्र के लिए काम करने वाले अरुण शिंदे भास्कर से बातचीत में कहते हैं कि यहां टोल टैक्स बड़ा मसला है। कोल्हापुर शहर में आने के लिए 9 रास्ते हैं और बगैर टोल टैक्स चुकाए आप शहर में प्रवेश नहीं कर सकते। इसे लेकर लोगों में राज्य सरकार के प्रति बेहद गुस्सा है। शिंदे कहते हैं कि इस सरकार ने केवल वादे किए, उसे पूरे करने में रुचि नहीं दिखाई। कोल्हापुर मनपा के विस्तार का मसला 30 सालों से अटका हुआ है। केंद्र में भले ही सरकार बदल गई हो, पर खेत मजदूर दलपति तेराडकर के लिए अभी भी महंगाई के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।

टोल टैक्स और एलबीटी से परेशान
पिछले 15 सालों से कोल्हापुर में किराना की दुकान चलाने वाले उमेश पई और उनकी पत्नी सुरभि पई एक स्वर में कहते हैं कि इस सरकार का जाना तो तय है। लोगों में बड़ा गुस्सा है। पई कहते हैं कि टोल टैक्स और एलबीटी की वजह से लोग परेशान हैं। कांग्रेस-राकांपा को इसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

स्थानीय नेता मजबूत
सुनील सकटे कहते हैं कि सरकार के प्रति नाराजगी तो हैं, लेकिन राकांपा के स्थानीय नेता मजबूत हैं। जिस तरह विपक्ष सरकार आने पर टोल टैक्स रद्द करने की बात कह रही है, इसका फायदा विस चुनाव में इन्हें मिल सकता है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले उमेश सिंह पिछले 30 सालों से कोल्हापुर में रह रहे हैं। वे कहते हैं कि इस बार बदलाव का रुख दिखाई दे रहा है।
बदलाव के संकेत साफ
राजस्थान के पाली जिले के मूल निवासी प्रेम चौहान बचपन से कोल्हापुर में रह रहे हैं। मिठाई की दुकान चलाने वाले चौहान कहते हैं कि बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। लोगों को लगता है कि सरकार बदली तो टोल टैक्स व एलबीटी से निजात मिल जाएगी। टोल टैक्स मसले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को कोल्हापुर के गांधी मैदान पर हुई राकांपा की पहली चुनावी सभा में उपमुख्यमंत्री अजित पवार को महालक्ष्मी की सौगंध खाते हुए 100 दिनों के भीतर टोल टैक्स खत्म करने का वादा करना पड़ा।

रुख से परे हैं सतेज

सरकार विरोधी रुख के बावजूद कोल्हापुर दक्षिण सीट से विधायक व राज्य के गृहराज्यमंत्री सतेज उर्फ बंटी पाटील की लोकप्रियता बरकरार है। सरकार के प्रति खुल कर नाराजगी का इजहार करने वाले स्थानीय लोग सतेज के कामकाज की तारीफ करते हैं। बाबूभाई पारिख पुल इलाके में रहने वाले उमेश सिंह कहते हैं कि लोग सरकार से नाराज हैं। इसके बावजूद स्थानीय विधायक व राज्य के गृहराज्य मंत्री सतेज पाटिल के कामकाज को लेकर संतुष्ट हैं।

कोल्हापुर जिले में विधानसभा की 10 सीटेंं हैं जिसमें 3 पर राकांपा, 2 पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि 2009 के विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर शिवसेना ने जीत दर्ज की थी और एक-एक सीटें भाजपा व जनसुराज पार्टी के हिस्से में आई थी।