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भाजपा-सेना सरकार के सत्ता में आते ही ठाकरे स्मारक के लिए समिति गठित

7 वर्ष पहले
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मुंबई. भाजपा-शिवसेना युति सरकार के सत्ता में आते ही दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहब के स्मारक का सपना साकार होते दिख रहा है। राज्य सरकार ने बालासाहब के स्मारक के लिए समिति का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के मुख्य सचिव स्वाधीन क्षत्रीय की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय अधिकार प्राप्त समिति गठित कर दी है। मुख्यमंत्री ने गत माह बालासाहब की दूसरी पुण्यतिथि पर बालासाहब का भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर दिया है। समिति में मुख्य सचिव समेत कुल आठ सदस्य होंगे। समिति बालासाहब के स्मारक बनाने के लिए भूखंड का चयन करेगी। इसके बाद स्मारक के निर्माणकार्य के लिए कदम उठाएगी। स्मारक दक्षिण मुंबई या फिर बांद्रा में बनने की संभावना है।
ये शामिल
समिति के सदस्य के रूप में अपर मुख्य सचिव पी एस मीणा, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव मनु कुमार श्रीवास्तव, श्रीकांत सिंह, कोंकण के विभागीय आयुक्त आर.एल.मोपलवार, मुंबई मनपा आयुक्त सीताराम कुंटे, मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया के साथ सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव को शामिल किया गया है।
जब ठाकरे की वसीयत पढ़ी गई सभी उत्तराधिकारी मौजूद नहीं थे
दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की वसीयत जब पढ़ी गई उस समय सभी उत्तराधिकारी वहां मौजूद नहीं थे। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में ठाकरे की वसीयत में गवाह व पेशे से वकील एफ.डिसूजा की गवाही में इस बात का खुलासा हुआ।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल के समक्ष डिसूजा ने कहा कि ठाकरे के मरणोपरांत उनके शयनकक्ष में उद्धव ठाकरे, शिवसेना नेता अनिल परब, शशि प्रभु, अधिवक्ता आदिक शिरोडकर व रविंद्र म्हात्रे मौजूद थे। वसीयत पढ़े जाने के बाद उद्धव के चेहरे के भाव सामान्य थे। वसीयत पर परब व शिरोडकर ने आश्चर्य व्यक्त किया था। आमतौर पर वसीयत सभी उत्ताराधिकारियों की मौजूदगी में पढ़ी जाती है पर जब ठाकरे की वसीयत पढ़ी गई उस समय उनके सभी उत्तराधिकारी मौजूद नहीं थे।
ठाकरे के बेटे जयदेव ने वसीयत की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान जयदेव की वकील सीमा सरनाइक के सवालों काजवाब देते हुए डिसूजा ने कहा कि वह उध्दव को जानता था। ठाकरे के निधन के बाद जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी मनस्थिति ठीक नहीं है इसलिए वे रविंद्र म्हात्रे से बात करंे।

साथ ही उन्होंने मुझे शिरोडकर से भी बात करने को कहा था। शिरोडकर ने वसीयत पढ़े जाने के बाद तुरंत प्रोबेट याचिका दायर करने का सुझाव दिया था क्योंकि ठाकरे बड़ी हस्ती थे। मीडिया में उनकी संपत्ति जानने को लेकर काफी उत्सुकता थी। तब से हम प्रोबेट याचिका दायर करने के काम में लग गए थे। मैंने ठाकरे की वसीयत का मसौदा बनाया था पर इसका एक पैसा नहीं लिया था। मैंने मसौदे में कुछ रिक्त जगह भी छोड़ी थी।
इस दौरान न्यायमूर्ति ने भी वसीयत की मौलिकता व डिसूजा की ओर से दी गई जानकारी पर सवाल किए। गौरतलब है कि ठाकरे ने अपनी संपत्ति का ज्यादातर हिस्सा उद्धव को दिया है। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले की सुनवाई 12 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। इस दिन भी डिसूजा की गवाही होगी। इस बीच ठाकरे की वसीयत के दूसरे गवाह डा.जलील परकार का हलफनामा भी रिकार्ड में लिया गया।