मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवगंत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की वसीयत से जुड़े विवाद को उनके बेटे उध्दव व जयदेव को आपसी सहमति से सुलझाने का सुझाव दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि विवाद आपसी सहमति व सामंजस्य से सुलझता है तो यह न सिर्फ बेहतर समाधान होगा बल्कि दोनों के हित में होगा। ठाकरे के बेटे जयदेव ने अपने पिता की वसीयत की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति गौतम पटेल ने इस पर सुनवाई करते हुए उध्दव व जयदेव के वकील को आपसी सहमति से मामला सुलझाने का सुझाव दिया। इस सुझाव के बाद उध्दव के वकील ने कहा कि हमने अपने मुवक्किल से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया था। पर वे विमान में थे इसलिए उनसे ठीक से बात नहीं हो पाई है। अब वे एक दो दिन में अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर अपना पक्ष रखेंगे।
लाभार्थी का नहीं बदला था नाम
इस बीच ठाकरे की वसीयत में गवाह व पेशे से वकील एफ डिसूजा ने कहा कि ठाकरे ने अपने वसीयत को लेकर बनाए गए कई मसौदों में लाभार्थी का नाम नहीं बदला था। जयदेव की वकील सीमा सरनाइक के सवालों का जवाब देते हुए डिसूजा ने कहा कि ठाकरे ने अपनी वसीयत से जुड़ी चर्चा अपने बेडरुम में की थी। जैसे ही वसीयत के मसौदे में उन्हें कोई खामी नजर आती थी वे तुरंत नए सिरे से वसीयत बनाने के लिए कहते थे। ठाकरे ने वसीयत में हस्ताक्षर करने से पहले उसे पढ़ा था। शुरुआत में ही ठाकरे को वसीयत से जुड़ी वैधानिकता की जानकारी दे दी गई थी।
टीडीआर दिखाया
सुनवाई के दौरान डिसूजा को जयदेव की ओर से खरीदे गए टीडीआर को भी दिखाया गया। जिसका इस्तेमाल मातोश्री के निर्माण में किया गया था। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई 17 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।