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भाजपा के आक्रामक तेवर से नरम पड़ी शिवसेना, गठबंधन पर बन गई बात!

7 वर्ष पहले
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(फोटो- उद्धव ठाकरे)
मुंबई. शिवसेना के अड़ियल रवैये के जवाब में भाजपा की ओर से आक्रामक तेवर अपनाने के बाद महायुति टिकने के आसार नजर आने लगे हैं। शुक्रवार शाम भाजपा व शिवसेना की उच्चस्तरीय बैठक में दोनों पक्षों ने नरम रवैए के संकेत दिए और जल्द ही गठबंधन को अंतिम रूप दिए जाने का भरोसा जताया। लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद शाम को पेडर रोड स्थित एक निजी बंगले में भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी आेम माथुर ने शिवसेना नेता सुभाष देसाई व उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे से मुलाकात की।
समझौते को लेकर करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद दोनों ने कहा कि महायुति जारी रहेगी आैर सीटों के फार्मूले को जल्द ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा। गौरतलब है कि सीट बंटवारे पर ठोस फैसला लेने के लिए शुक्रवार देर रात उद्धव व माथुर के बीच बैठक भी हाेनी थी। साफ है कि पिछले कुछ दिनों से जारी नाटकीय घटनाक्रम के बाद दोनों पार्टियों ने राहत की सांस ली है।

119 सीटों के प्रस्ताव पर भाजपा ने जताई नाराजगी
गुरुवार रात शिवसेना नेताओं ने भाजपा को पुराने फार्मूले के तहत 119 सीटें देेने का संदेश दिया था। इससे नाराज भाजपा ने शुक्रवार सुबह कोर समिति की बैठक की और शिवसेना के प्रस्ताव को नामंजूर करते हुए नया प्रस्ताव भेजा। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि पिछले 25 साल में शिवसेना ने 59 सीटें और भाजपा ने 19 सीटों पर कभी चुनाव नहीं जीता है। इस पर बातचीत होनी चाहिए।

खड़से ने कहा सेना के लिए भाजपा ने किया त्याग: विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से ने कहा कि भाजपा के कार्यकार्ताओं को शिवसेना का 119 सीटों को प्रस्ताव मान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन में भाजपा को 32 सीटें और शिवसेना को 16 सीटें देने का फार्मूला तय किया गया था। लेकिन भाजपा ने शिवसेना को अधिक सीटें दी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा केवल 26 सीटों पर चुनाव लड़ी। शिवसेना को 22 सीटें दी गई। भाजपा ने शिवसेना के लिए त्याग किया है।
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