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डाउनलोड करेंमुंबई।यदि कोई सीधे सीबीआई के पास शिकायत लेकर आएगा तो क्या वह उसका संज्ञान नहीं लेगी? आखिर सीबीआई क्यों चाहती है कि प्रत्येक नागरिक उसके कार्यालय में आए, आवेदन फार्म भरे व हस्ताक्षर करे तभी वह एफआईआर दर्ज करेगी। क्या ऐसा करना जरूरी है? सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह बात सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर व प्रवीण वाटेगांवकर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।
याचिका में सिंंचाई घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति एसबी सुक्रे की खंडपीठ ने कहा कि वह तिरोडकर की ओर से पेश किए गए तीन सौ पन्नों के दस्तावेजों को शिकायत के रूप में क्यों नहीं लेती है? यदि सीबीआई को लगता है कि तिरोडकर के दस्तावेज शिकायत दर्ज करने के लिए पर्याप्त नहीं है तो वह उन्हें नजरअंदाज कर सकती है। इस पर सीबीआई के वकील ने कहा कि सीबीआई कार्यालय में केतन ने कोई शिकायत नहीं की है। जवाब में केतन ने कहा कि मेरी सिर्फ इतनी मांग है कि सीबीआई सिंचाई परियोजनाओं में हुए कथित घोटालों की जांच करे।
पिछले दिनों जारी एक अधिसूचना के मुताबिक सीबीआई भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों को सीधे दर्ज कर सकती है। इसका उसकी वेबसाइट में भी जिक्र किया गया है। इस मामले को लेकर नागपुर सहित कई जगहों पर याचिकाएं प्रलंबित हैं। तिरोडकर ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत से जुड़े दस्तावेज सीबीआई को सौंपे है। लेकिन सीबीआई ने जांच की दिशा में कोई पहल नहीं की है।
इस पर खंडपीठ ने तिरोडकर को सीबीआई की वेबसाइट में मौजूद दस्तावेज व वह अधिसूचना दिखाने को कहा जिसमें सीबीआई को सीधे शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है। सुनवाई के दौरान तिरोडकर के पास वह दस्तावेज मौजूद नहीं थे। लिहाजा खंडपीठ ने इस मामले को लेकर अपने लिखित आदेश में सीबीआई को कोई निर्देश नहीं दिया व तिरोडकर को अपनी दलील से जुड़े दस्तावेज याचिका के साथ जोडऩे को कहा। वहीं वाटेगावंकर को भी अपनी याचिका में जरूरी बदलाव करने की अनुमति दे दी।
वाटेगावंकर ने गोसीखुर्द व कोंकण सिंचाई विकास महामंडल में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इसके साथ ही कोल्हापुर के एक आयकर अधिकारी को ंिसंचाई परियोजना में अनियमितता को दर्शानेवाले दस्तावेज कोर्ट में पेश करने का निर्देश देने की मांग की है। इस बीच सरकारी वकील ने खंडपीठ के समक्ष कहा कि सरकार ने पहले ही सिंचाई विभाग में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई दो सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी।
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